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भाजपा सरकार के कथनी और करनी में अंतर

मैं अगर सरकार की नाकामी गिनाना शुरू करूं तो पोस्ट लंबी हो जाएगी। क्या आप बता सकते हैं कि सत्ताधारी भाजपा अपने घोषणा , दावे और वादे पर कितना खड़ी उतरी है? केंद्र सरकार के किस विभाग में 5 साल में नियुक्तियां हुई है? कृषि,पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धि शून्य है। कम आय वाले वर्ग को बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता ने जीना दूभर कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली में सीलिंग, जीएसटी ने व्यापार और कामगार दोनों का कमर तोड़ दिया है। देश के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है और सरकार बड़े उद्योगपतियों को विभिन्न शब्दों के मायाजाल से छूट दिए जा रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा,उसके खाद्यान्न के भंडारण हेतु सुविधाएं नहीं बढ़ी। गन्ना किसानों को चीनी मिलों से बकाया नहीं मिल पा रहा, कर्ज के बोझ के कारण अभी भी किसान आत्महत्या के लिए मजबूर है।  शिक्षा,स्वास्थ्य,रेलवे का बाजारीकरण कर निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया। साजिश के तहत सरकारी क्षेत्र की कंपनियां घाटे में चली गई और अब उसे औने पौने दामों में निजी क्षेत्र को बेची जाएगी। अकेले रेलवे में लाखों कर्मचारियों को बाहर निकाला जा रहा है। निजी क्षेत्र की कंपनियों में भविष्य निधि, बीमा, ईएसआई,बोनस की सुविधाएं भी कर्मियों को नसीब नहीं। जिन जल पर जनता का अधिकार होना चाहिए ,के अधिकार को छीनकर पेयजल की कंपनियों के हवाले कर दिया गया है।,जिससे भूजल का स्तर नीचे चला गया है। कट्टर मुसलमानों द्वारा लव जेहाद, मोब लिंचिंग,हत्या, बलात्कार,राष्ट्रद्रोही गतिविधियों में वृद्धि के बाबजूद गिरफ्तारी की कार्यवाही नहीं हो पा रही। उन्नाव के भाजपा विधायक सेंगर द्वारा बलात्कार, धमकी एवम हत्या के बाबजूद पार्टी और प्रशासन स्तर पर कार्यवाही नहीं होना क्या साबित करता है? पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, भ्रष्ट, दुराचारियों को पार्टी में शामिल करके पार्टी सरकार तो बना सकती है, पर ऐसे में पार्टी के मूल सिद्धांतों का क्या होगा? इस सरकार को भाजपा सरकार के बजाय  मोदी सरकार क्यों कहा जाता है? मंत्रियों की कोई औकात नहीं है क्यों संपूर्ण सरकार और संगठन दो व्यक्ति मोदी और अमित शाह तक केंद्रित हो गई है। इसी कारण भाजपा के स्थायी अध्यक्ष का चयन नहीं हो पा रहा। पांच साल तक पार्टी ने  अपने आरटीआई प्रकोष्ठ को खाली रखा। मोदी सरकार से आखिर कौन खुश है, केवल अडानी, अंबानी और गुजराती धनाढ्य, अप्रवासी भारतीय जिनलोगों ने चुनाव के दौरान भाजपा को धनधान्य से भर दिया, वे तो उसकी कीमत वसूलेंगे ही। अपने पक्ष में सरकार से निर्णय करवाएंगे ही।राजनैतिक दलों को  दान शुद्ध व्यवसाय जो ठहरा। कितने एक राष्ट्र एक कर के नारे देकर जीएसएसटी लागू करने वाली भाजपा राजनैतिक दलों को टैक्स से बाहर करने के साथ साथआरटीआई के दायरे से बाहर करके उसकी धार कमजोर करने के लिए सूचना आयुक्त की नियुक्ति का अधिकार अपने हाथ में ले लिया है।
#प्रस्तोता गोपाल प्रसाद आरटीआई कार्यकर्ता एवम निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा अमेठी से उनके वाट्सएप :9910341785, ईमेल: sampoornkranti@gmail.com पर संपर्क किए जा सकता है।

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एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…