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Showing posts from August, 2019

नागार्जुन की कविता में दलित चेतना का स्वर

दलित चेतना को सिर्फ प्रहार और ध्वंस ही नहीं करना है,उसे यथासंभव अपने स्रोतों से जुड़ना है और विकसित भी होना है। ढांचे में सबकी समाई होनी चाहिए- खासतौर पर विकसित चेतना के ढांचे में।

कौन केवल आत्मबल से जूझकर
जीत सकता देह का संग्राम है
पाशविकता खड्ग जो लेती उठा
आत्मबल का एक वश चलता नहीं,
योगियों की शक्ति से संसार में
हारता लेकिन नहीं समुदाय है।

*नागार्जुन की वह कविता
जो मुझे प्रिय है।*

*अभिमन्यु ने गर्भ में चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विधि सीखी थी। हरिजन भ्रूणों ने अपने जनकों के जिंदा जलाए जाने की यातना सही। उनका भाग्य उन हथियारों से नियत हो गया, जिनसे उनके पिताओं को मारा गया था।* *हरिजन शिशु की हथेली पर उन हथियारों के निशान थे। हथेली पर निशान यानी भाग्य रेखा। उसकी हथेलियों पर ध्वज, अंकुश, कमल, चक्र के चिन्ह थे।*
"देख रहा था नवजात के
दाएं कर की नरम हथेली
सोच रहा था इस गरीब ने
सूक्ष्म रूप में विपदा झेली
आड़ी तिरछी रेखाओं में
हथियारों के ही निशान हैं
खुखरी है,बम है,असि भी है
गंडासा भाला प्रधान है।"

*# प्रस्तोता : गोपाल प्रसाद, दिल्ली*

रामधारी सिंह दिनकर के रेणुका काव्य संग्रह से

*तू पूछ अवध से राम कहां
वृंदा बोलो घनश्याम कहां
ओ मगध! कहां मेरे अशोक
वह चंद्रगुप्त बलधाम कहां

पैरों पर ही है पड़ी हुई
मिथिला भिखारिणी सुकुमारी
तू पूछ कहां इसने खोई
अपनी अनंत निधियां सारी?

री कपिलवस्तु! कह बुद्धदेव
कि वे मंगल उपदेश कहां?
तिब्बत, ईरान,जापान,चीन
तक गए हुए संदेश कहां?

वैशाली के भग्नावशेष से
पूछ लिच्छवी शान कहां
ओ री उदास गंडकी!बता
विद्यापति कवि के गान कहां?

तू तरुण देश से पूछ अरे
गूंजा कैसा यह ध्वंस राग?
अंबुधि- अन्तस्तल-बीच छिपी
यह सुलग रही है कौन आग?

#प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद,दिल्ली

क्या आप जानते हैं कि केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005में संशोधन क्यों किया?

एक ऐसी ताकत, जिसका सहारा लेकर आप किसी भी बड़े-बड़े से बड़े दबंग, बाहुबली (चाहे वह  किसी भी स्तर का अधिकारी, मैजिस्ट्रेट या जज ही क्यों ना हों) के खिलाफ उसी के द्वारा किये गये अपराधों को सामने ला सकते हैं और संवैधानिक नियम के तहत उसके किये अपराध की उसे सजा दिला सकते हैं| यह RTI (सूचना का अधिकार) देश में मौजूद एक गरीब से गरीब व्यक्ति को भी उतनी ही ताकत देता है जितनी किसी अरबपति, बाहुबली या दबंग को है| आप ये समझ कर RTI (सूचना का अधिकार) के प्रावधान को अनदेखा मत कीजिये कि, हमें क्या जरूरत है इस अधिकार की? यह तो केवल प्रोफेश्नल लोगों को जैसे NGO, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील या RTI एक्टीविस्ट आदि की ही जरूरत है|
आपको समझना होगा कि, इस ताकत व अधिकार का उपयोग करके आप बहुत ही कम समय में, कम खर्च में व दलाली दिये बिना  अपने चलने वाले मामलों में बेहतरीन सफलता हासिल कर सकते हैं साथ ही अपनी आमदनी (स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे साधनों में सुधार) में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं|
अतः यह RTI कुछ गिने-चुने लोगों की ताकत नहीं है बल्कि देश के अंतिम व्यक्ति तक को इसकी ताकत का लाभ प्राप्त हो सकता है| इस RTI का अगर आप व…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर व्यापक विमर्श संपन्न

*इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन की ओर से  दिल्ली विश्वविदयालय के रामजस कॉलेज में "राष्ट्रीय शिक्षा नीति" पर व्यापक विमर्श संपन्न*
*(नई दिल्ली, 4 जुलाई,2019)*
*दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन की ओर से दिनांक 4 जुलाई 2019 को  "राष्ट्रीय शिक्षा नीति" विषय पर बुद्धिजीवियों ने अपने विचारों का आदान प्रदान किया।*        *इस कार्यक्रम में संस्था की पिछली गतिविधियों यथा *"परीक्षा सुधार"* *की अनुशंसा जिसे तत्कालीन कुलपति ने स्वीकार किया था, के बारे में भी बताया गया।सर्वविदित है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट जनता के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वेबसाईट पर सार्वजनिक करते हुए 30 जून 2019 तक सुझाव मांगा गया था जिसे अब बढ़ाकर 31जुलाई कर दिया गया है।*  *कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के सचिव डॉ. धनीराम जी ने कहा कि किसी भी पॉलिसी को लागू करने के लिए निर्धारित ऑब्जेक्ट होना चाहिए, ऑब्जेक्ट को प्राप्त करने के लिए मैथड होना चाहिए।सबसे महत्वपूर्ण बात जो  इस शिक्षा नीति में नजर नहीं आती कि शिक्षा का उद्द…

भाजपा सरकार के कथनी और करनी में अंतर

मैं अगर सरकार की नाकामी गिनाना शुरू करूं तो पोस्ट लंबी हो जाएगी। क्या आप बता सकते हैं कि सत्ताधारी भाजपा अपने घोषणा , दावे और वादे पर कितना खड़ी उतरी है? केंद्र सरकार के किस विभाग में 5 साल में नियुक्तियां हुई है? कृषि,पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धि शून्य है। कम आय वाले वर्ग को बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता ने जीना दूभर कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली में सीलिंग, जीएसटी ने व्यापार और कामगार दोनों का कमर तोड़ दिया है। देश के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है और सरकार बड़े उद्योगपतियों को विभिन्न शब्दों के मायाजाल से छूट दिए जा रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा,उसके खाद्यान्न के भंडारण हेतु सुविधाएं नहीं बढ़ी। गन्ना किसानों को चीनी मिलों से बकाया नहीं मिल पा रहा, कर्ज के बोझ के कारण अभी भी किसान आत्महत्या के लिए मजबूर है।  शिक्षा,स्वास्थ्य,रेलवे का बाजारीकरण कर निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया। साजिश के तहत सरकारी क्षेत्र की कंपनियां घाटे में चली गई और अब उसे औने पौने दामों में निजी क्षेत्र को बेची जाएगी। अकेले…

राजा संजय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद अमेठी में राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई अब तेज होगी

क्या कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने से अमेठी के राजा संजय सिंह का  अपराध खत्म हो जाएगा? उनको समर्थन करने का मतलब है राजतंत्र का समर्थन और लोकतंत्र का विरोध। जिनके लिए नीति और सिद्धांत की कोई अहमियत नहीं हो,ऐसे आयाराम गयाराम नेताओं से क्या लोकतंत्र का कोई भला होने वाला है? इनको जनता के हक और हित से कोई लेना देना नहीं है, इसलिए इनको एवम इनकी दूसरी पत्नी अमिता मोदी उर्फ अमिता सिंह को अमेठी और सुल्तानपुर की जनता बार बार नकार चुकी है। थोक के भाव में कांग्रेसियों को भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस और भाजपा में अंतर जानना मुश्किल हो गया है। असली नुकसान तो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं का होना है। अमेठी की जागरूक जनता को यह तय करना ही होगा कि उसका जनप्रतिनिधि दलबदलु नेता होगा या समर्पित,निष्ठावान, ईमानदार और क्रियाशील जमीनी कार्यकर्ता। अमेठी के मान - सम्मान ,स्वाभिमान, सशक्तिकरण , विकास और न्याय के लिए संकल्पित आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपके साथ हमेशा रहेगा।
#गोपाल प्रसाद, निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा अखिलेश अमेठी अग्रहरि मार्केट कॉम्प्लेक्स, सगरा रोड, अमेठी