Skip to main content

सौर ऊर्जा कंपनी के साथ जुड़कर सशक्त होने का अवसर

भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए कई संस्थाएं एवम व्यक्ति सक्रिय है, उन्हीं में से एक है - ऊर्जा ग्लोबल लिमिटेड नामक कंपनी जिसका ध्येय सौर ऊर्जा का अधिकतम उत्पादन कर जनता को सस्ती बिजली, स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ साथ आर्थिक रूप से सशक्त करना है। इस कंपनी के संस्थापक जी. एन. गुप्ताजी का मानना है कि देश के हर पंचायतों में समस्या है। गाय,गोबर,जैविक उत्पाद, स्वास्थ्य,शिक्षा,पेयजल, सड़क, बेरोजगारी आदि। इसी को देखते हुए प्रत्येक शनिवार को कंपनी की ओर से मुफ्त प्रशिक्षण चलाया जा रहा है ताकि बेरोजगार युवा प्रशिक्षित होकर काम कर सके और स्वाबलंबी बन सके।परिवर्तन के दौर में हमें नई नई चुनौतियों का सामना करने हेतु तैयार रहना होगा। यहां सौर उर्जा से बिजली उत्पादन का डेमो भी दिया जाता है। सौर ऊर्जा से चलनेवाली गाड़ियों के टेस्टिंग की मुफ्त व्यवस्था भी है।कंपनी का मुख्य फोकस सौर ऊर्जा और सौर बैट्री है। कंपनी की योजना देश के सभी क्षेत्र में बेरोजगारों को प्रशिक्षित कर इसके बिजनेस मॉडल से जोड़ना है।वे कहते हैं कि आज हर आदमी नर्वस है,आत्महत्या की प्रवृति और संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिसके पास सुविधा साधन है, वह भी परेशान है। ऐसी स्थिति में संपर्क, समन्वय, संवाद, सहयोग के माध्यम से समझा बुझाकर लोगों को जोड़ने की परम आवश्यकता है ताकि लोगों को संतुष्टि मिल सके।कंपनी की सोलर बैट्री की फैक्ट्री हरियाणा के बहादुरगढ़ में है। कंपनी ने जयपुर के समीप कालाडेरा के 50 एकड़ क्षेत्र  में ऊर्जा विश्वविद्यालय की स्थापना भी किया है,जिसमें सरकारी आईटीआई की तर्ज पर सोलर ट्रेनिंग दी जाएगी। भारत के विशाल मानव संसाधन का भरपूर उपयोग करके जीने की नई ऊर्जा देते हुए नव भारत के निर्माण का सपना पूरा करना हमारा लक्ष्य है। सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी मुद्रा बाजार जा रही थी। चीन के वर्चस्व को खत्म कर भारत को अग्रिम पंक्ति में लाकर हमने खड़ा कर दिया है। हमारा नारा है - "योर विजन, आवर पैशन".सोलर पैनल से चलनेवाली ऊर्जा व्हिकल की कीमत दो लाख पचपन हजार है।कंपनी की सीईओ प्रिया भल्ला का नारा है- "ऊर्जा बनाओ,ऊर्जा बचाओ,खाली छत से पैसा कमाओ और  समृद्धि लाओ।इसके लिए उनका कॉल सेंटर फोन करके युवाओं, बेरोजगारों, सेवानिवृत्त कर्मियों को एक दिन के प्रशिक्षण के बाद अपग्रेड कर दिया जाता है*।* * *विस्तृत जानकारी के लिए कंपनी के वेबसाईट www.urjaglobal.in को अवश्य देखें।*
*#प्रस्तोता गोपाल प्रसाद से इस संदर्भ में उनके वाट्सएप नंबर- 9910341785 पर संपर्क किया जा सकता है।*

Comments

Popular posts from this blog

वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सांसद मधुकोड़ा का मामला भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया है । जिसमें ४ हजार करोड़ के घपले का पता चला है । कोड़ा का नाम भी उन राजनेताओं में जुड़ गया है जो भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाये गए हैं या घिरे हुए हैं । भ्रष्टाचार को फैलाने वाले राक्षस सत्ता में आसीन राजनीति के शीर्ष नेता हैं इसकी शुरूआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही हो गई थी । १९५६ में खाद्यान्‍न मंत्रालय में करोड़ों रूपये की गड़बड़ी पकड़ी गई । जिसे सिराजुद्दीन काँड के नाम से जाना जाता है । उस समय केशवदेव मालवीय खाद्यान्‍न मंत्री थे उन्हें दोषी पाया गया । १९५८ में भारतीय जीवन बीमा में मुंधरा काँड हुआ जिसकी फिरोज गाँधी ने पोल खोली थी । १९६४ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए “संथानम कमिटी” का गठन किया गया ।…

एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…