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मानवाधिकार और पशु अधिकार के बीच द्वंद्व

*आवारा पशुओं के आतंक के समाधान विषय पर गोष्ठी का आयोजन संपन्न*

*मानवाधिकार और पशु अधिकार के बीच द्वंद्व*

*दिल्ली,27 जुलाई 2019)*

*दिल्ली के रामजस काॅलेज में 27 जुलाई को "आवारा पशुओं के आतंक" विषय पर  युनाईटेड रेजिडेंट्स ऑफ दिल्ली (URD)  एवम यूपीएससी सेल रामजस कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली नगर निगमों के साथ संवाद व जागरूकता अभियान के क्रम में  विचारमंथन गोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन में दिल्ली के तीनों नगर निगमों के स्थाई समिति के अध्यक्ष (दक्षिणी दिल्ली के चेयरमैन योगेन्द्र गुप्ता, पूर्वी दिल्ली के चेयरमैन संदीप कपूर, उत्तरी दिल्ली के चेयरमैन जयप्रकाश जेपी) दिल्ली के विभिन्न इलाके से आए RWA के प्रतिनिधियों एवम बुद्धिजीवियों , सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उक्त गंभीर समस्या पर अपनी चिंता जाहिर की। अपने संबोधन में सभा के संयोजक सौरभ गांधी एवं डॉ धनीराम       ने इच्छुक सभी आगंतुकों से विचार रखने का अनुरोध किया। रामजस काॅलेज के यूपीएससी सेल के अध्यक्ष डॉ. धनीराम जी ने इस महत्वपूर्ण विषय के मूल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण एवम अवैध निर्माण के कारण हो रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने कहा कि निगम के भ्रष्टाचार को उठानेवाले के ऊपर फर्जी मुकदमे दर्ज हो जाती है,और दिल्ली पुलिस मूकदर्शक है। दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली नगर निगमों के क्षेत्र के अवैध निर्माण एवम अतिक्रमण पर कोई कार्यवाही नहीं होती। दिल्ली पुलिस, डीडीए, नगर निगम की आपसी मिलीभगत से इसे अंजाम दिया जा रहा। सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली नगर अब अतिक्रमण एवम अवैध निर्माण नहीं होने देने का हलफनामा देती है पर स्थिति यथावत है।  आज दिल्ली के नगर निगम भ्रष्टाचार के सूचकांक में नंबर वन है। उन्होंने कहा कि निगम किस कानून और नैतिक सिद्धांतों के बल पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण को नियमित कर सकती है? यह जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग है। क्या इसीलिए दिल्ली की जनता ने तीनों निगमों में भाजपा को पूर्ण बहुमत से जिताकर भेजा था? उन्होंने दावा किया कि पशु प्रेम के नाम पर चल रहे गैर सरकारी संगठनों की समय समय पर सोशल ऑडिट हो एवम आम जनता इसकी मोनीटरिंग करे। अपने हित को साधने वाले एवम जनहित की उपेक्षा करनेवाले इन तथाकथित एनजीओ की कलई भी खुलनी चाहिए।*
*आरटीआई सेना के अध्यक्ष गोपाल प्रसाद ने कहा कि दिल्ली के नागरिकों को निगम एवम राज्य सरकार के  घोषणाओं पर विश्वास करने के बजाय उसके कामकाज की मॉनिटरिंग हेतु व्यापक स्तर पर शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक जनता जागरूक नहीं होगी उस उसका अधिकार नहीं मिलेगा। इस हेतु वे दिल्ली के सभी RWA संगठनों की समस्याओं को उठाने हेतु आरटीआई का लोक शिक्षण एवम लोक प्रशिक्षण  कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इस हेतु दिल्ली के किसी भी क्षेत्र में वे अपना समय दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के औनेररी स्टेट एनिमल वेलफेयर ऑफिसर हैं और उन्होंने बोर्ड के प्रशिक्षण कार्यालय बल्लभगढ़ से पशु क्रूरता अधिनियम एवम पशु अधिकार, आपदा, पशु प्रबंधन,  पर्यावरण,पशुपालन एवं कानूनी विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने इस बोर्ड को दिशानिर्देश जारी करने एवम प्रशिक्षण तक सीमित कर दिया है,जबकि इस बोर्ड को पूर्ण अधिकार संपन्न बनाए जाने की आवश्यकता है,क्योंकि क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी अलग है। वास्तव में पशुओं से संबंधित इस महत्वपूर्ण विषय पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार के साथ जन भागीदारी के रूप में RWA को अपनी भूमिका संयुक्त रूप से निभानी होगी, बिना इसके समस्त समस्याएं यथावत रहेगी। सांसद, विधायक अपने लिए आजीवन पेंशन पाने की व्यवस्था कर चुके हैं , पर इस हेतु मॉनिटरिंग की जिम्मेवारी निभानेवाले को स्वैच्छिक रूप से योगदान देने के लिए कहा गया है। क्या यह न्यायोचित है?*
                *दिल्ली के मुखर सामाजिक कार्यकर्ता  राजीव काकरिया ने कहा कि दिल्ली में सभी जानवरों यथा गाय,बैल,सांध, कुत्ता,बंदर, सूअर आदि की वार्षिक पशुगणना अनिवार्य हो और उस सार्वजनिक रूप से वेबसाईट पर डाला जाए। जानवरों के कल्याणार्थ बजट का प्रावधान हो जिससे उसके आश्रय केंद्र, दवा, बंध्याकरण आदि पर खर्च किया जा सके। सभी लिस्टेड एनजीओ तथा उसको दिए गए अनुदान का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से वेबसाईट पर उपलब्ध हो। कुत्ते, बंदर,बिल्ली, सूअर, सांप आदि के काट लेने पर  होने वाले नुकसान का मूल्यांकन की व्यवस्था हो, पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित की भागीदारी योजना को स्थाई रूप से मूर्ति रूप दिया जाय। कुत्ते के बंध्याकरण कर एक इलाके से दूसरे इलाके में छोड़ देने एवम बंध्याकरण हो चुके कुत्ते की पहचान सुनिश्चित करने की मोनीटरिंग की व्यवस्था पारदर्शी हो और जिम्मेवारी सुनिश्चित की जाए। निर्धारित समय पर सारे खर्च की सोशल ऑडिट हो।* *जानवरों के काट लेने पर दी जाने वाली वैक्सीन की कालाबाजारी रोकी जाय और सुगम रूप से  उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसकी आपूर्ति करने वाली एजेंसी   को ब्लैकलिस्टेड की जाए एवम अविलंब अन्य को ठेका दिया जाय। इस हेतु किसी भी हालत में राशि के आवंटन कम ना हो। गैर सरकारी संस्थाओं के पशु प्रेम के रहस्य के पर्दाफाश करते हुए वे कहते हैं कि अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि हमने उनका घर छीन लिया अब वे कहां जाएं? वास्तव में उनके पशु प्रेम अलग कारणों अर्थात फंड से है और आम जनता का पशुप्रेम संवेदना के कारण। जो व्यक्ति गाय, कुत्ता,बंदर,कबूतर को खाना खिलाकर पुण्य कमाना चाहते हैं उनके लिए कोई नियम ही नहीं है। जरूरत इस बात की है कि एक ऐसा कानून बने जो जनता के स्वास्थ्य सरोकार से जुड़ा हो। बीमार एवम लाचार लोगों के लिए इच्छामृत्यु के कानून  की तर्ज पर बीमार पशुओं को मार देने हेतु स्पष्ट कानून बनने चाहिए। पालतू पशुओं के मालिकों पर तो कार्यवाही करने का प्रावधान है, पर निराश्रित जीवों के संबंध में कार्यवाही किस पर और कैसे हो? उसकी जिम्मेवारी कैसे सुनिश्चित की जाय?*
 *कार्यक्रम संयोजक सौरभ गांधी कहते हैं कि वास्तव में यह लड़ाई मानव अधिकार बनाम पशु अधिकार का है। अप्रत्यक्ष रूप से पीपल्स फॉर एनिमल संस्था की संस्थापक श्रीमती मेनका गांधी जी इस मुद्दे पर केवल पशु अधिकार की राग अलापती हैं , पर उन्हें मानव के अधिकार दिखाई नहीं देता। क्या मानव को जानवरों से तुच्छ समझा जाए?*

          *दक्षिणी दिल्ली स्थाई समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र गुप्ता ने कहा कि जब तक हम दूसरों की समस्याओं को नहीं समझेंगे, तब तक उसका समाधान नहीं होगा। दक्षिणी दिल्ली में 14 एनजीओ जो इस मुहिम में जुड़े हैं,उनकी मांग है -  काटनेवाले कुत्ते की समस्या का समाधान। उन एनजीओ के ऊपर भी नकेल कसुंगा जो बंध्याकरण के नाम पर  रकम डकार रहे हैं। बंध्याकरण होने वाले कुत्ते का कान काट दिया पर कुत्ते को कौन देखने जाएगा? RWA इन समस्याओं के निदान करने का संकल्प ले।  विज्ञापन में बंदर को पकड़ने के लिए  पहले एक हजार फिर दो हजार कर दिया,पर हमें बंदरों को छोड़ना पड़ा क्योंकि बंदर के साथ बंदर का बच्चा भी पकड़ने का बेफिजूल शर्त का कानूनी प्रावधान था। भाटी गांव में भी कुत्ते की समस्या है पर वहां लोग बंध्याकरण केंद्र का विरोध कर रहे हैं । कुत्ता काटने की समस्या का समाधान तो सभी चाहते हैं पर  अपने क्षेत्र में कुत्ता आश्रय केंद्र की स्थापना  कोई नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर संवेदनशील हैं और आप सभी नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं,क्योंकि उन्होंने डरते हुए बच्चों की वेदना को देखा है। जानवर इंसान की जान ले ले तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर आप जानवर की जान नहीं ले सकते, यह कैसा कानून है?*
 *इस अवसर पर जलाधिकार फाउंडेशन की ओर से स्मारिका का विमोचन एवम वितरण किया गया एवम अंत में भोजन के उपरांत रामजस कॉलेज के स्पोर्ट्स कैंपस में  सभी पदाधिकारियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया । इस कार्यक्रम में स्वैच्छिक सेवा दे रहे विद्यार्थियों ने आगत अतिथियों एवम सहभागियों  का आभार प्रकट किया।*
*(प्रस्तोता गोपाल प्रसाद दिल्ली स्थित अारटीआई कार्यकर्ता हैं और विशेष रूप से जल, जंगल, जमीन,जन और जानवर के मुद्दे पर आंदोलनों से जुड़कर व्यवस्था परिवर्तन हेतु प्रयासरत हैं।आपसे संपर्क,समन्वय, संवाद एवम सहयोग की अपेक्षा है।इस हेतु उनके वाट्सएप नंबर 9910341785 एवं ईमेल: sampoornkranti@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)*

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