Skip to main content

पुत्र हरिओम का दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी (संध्या) कॉलेज में नामांकन

पुत्र हरिओम का दिल्ली विश्वविद्यालय के PGDAV(Evening) कॉलेज में नामांकन

मेरे बड़े बेटे हरिओम ने  दिल्ली विश्वविद्यालय के PGDAV(Evening) कॉलेज में पांचवीं कट ऑफ लिस्ट में अपना क्रम आने पर बीए प्रोग्राम (अर्थशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान) में आज नामांकन कराया. समाजसेवा, लेखन एवं कार्यक्रमों की व्यस्तता के बीच बच्चों के लिए भी कभी कभार समय निकालना ही पड़ता है. नामांकन हेतु ऑनलाइन पंजीकरण के बाद कट ऑफ लिस्ट की मॉनीटरिंग और फिर कट ऑफ की श्रेणी में आने पर तुरंत कॉलेज जाकर आवेदन करने की प्रक्रिया का पालन करते हुए, शुल्क जमा करने की ऑनलाइन प्रक्रिया  हमारे लिए भी नया अनुभव था.
                                   अपनी मातृभूमि बिहार के दरभंगा जिले के टॉप सी.एम.साइंस कॉलेज में बर्ष 1987 में नामांकन के दिन याद आ गए. उस वक्त वहां के किरानी बाबू से मेरी झड़प हो गई थी, क्योंकि उन्होंने मुझसे निर्धारित फीस से 100 रूपए ज्यादा मांगे थे और मैंने अंततः नहीं दिए तथा विद्रोह का रास्ता अख्तियार किया था; परन्तु अब सब कुछ ऑनलाइन, कितना बदल गया जमाना !
                                  समाज की विभिन्न समस्याओं से रूबरू होना, विषय की जानकारी प्राप्त करना, उसपर चिंतन मनन के बाद निराकरण हेतु प्रयास को गति देने की अपनी आदत से मजबूर हूँ. इस आदत के कारण घर परिवार की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी कई बार संकट उत्पन्न हो जाता है. परन्तु जिन मित्रों ने मुझे जाना है,देखा है, परखा है; उन्होंने मुझे सहयोग देकर प्रोत्साहित भी किया है. मेरे बेटे ने सामान्य श्रेणी के  छात्र के रूप में नामांकन करवाने का दुस्साहस किया है.
                                  मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. धनीराम एवं  उनके मित्रगण का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने एक झटके में हमारी समस्या (पुत्र के फीस भरने) का समाधान ऑनलाइन भुगतान करके कर दिया. मुझे लगता है अंतिम समय में मेरे मददगार के रूप में ईश्वर किसी न किसी को माध्यम बनाकर भेज ही देता है. सुविधा साधन के अभाव के बाबजूद अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद अपने पुत्र के  दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज में नियमित छात्र के रूप में नामांकन का सपना पूरा होने पर कितनी खुशी और संतोष मिली,यह मैं बयां नहीं कर सकता. अर्थाभाव के कारण मैं दरभंगा में स्नातक प्रथम वर्ष पूरा करने के बाद, पढाई अधूरी छोड़कर ही दिल्ली आ गया था. अब पुत्र से आस है. मेरा सपना है कि वह आगे संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा की तैयारी करे.
                                 हलांकि हमारी पुरानी और अनुभवी  सोच तथा पुत्र हरिओम के नई सोच के बीच द्वंद जारी है. इसके बाबजूद भी मैं आशावान हूँ. आर्यसमाज से सीखे संस्कार, दीक्षा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सीखे अनुशासन एवं चरित्र निर्माण के बाद अब वह मेरे मार्गदर्शन में रहेगा. मुझे विश्वास है कि मेरा पुत्र अपने कर्तव्यपथ पर चलते हुए एक दिन कीर्तिमान के झंडे गाड़ेगा. आपके आशीर्वाद की कामना एवं सलाह, सुझाव अपेक्षित है.

Comments

Popular posts from this blog

वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सांसद मधुकोड़ा का मामला भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया है । जिसमें ४ हजार करोड़ के घपले का पता चला है । कोड़ा का नाम भी उन राजनेताओं में जुड़ गया है जो भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाये गए हैं या घिरे हुए हैं । भ्रष्टाचार को फैलाने वाले राक्षस सत्ता में आसीन राजनीति के शीर्ष नेता हैं इसकी शुरूआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही हो गई थी । १९५६ में खाद्यान्‍न मंत्रालय में करोड़ों रूपये की गड़बड़ी पकड़ी गई । जिसे सिराजुद्दीन काँड के नाम से जाना जाता है । उस समय केशवदेव मालवीय खाद्यान्‍न मंत्री थे उन्हें दोषी पाया गया । १९५८ में भारतीय जीवन बीमा में मुंधरा काँड हुआ जिसकी फिरोज गाँधी ने पोल खोली थी । १९६४ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए “संथानम कमिटी” का गठन किया गया ।…

एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…