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राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर व्यापक विमर्श संपन्न

*इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन की ओर से  दिल्ली विश्वविदयालय के रामजस कॉलेज में "राष्ट्रीय शिक्षा नीति" पर व्यापक विमर्श संपन्न*

*(नई दिल्ली, 4 जुलाई,2019)*

*दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन की ओर से दिनांक 4 जुलाई 2019 को  "राष्ट्रीय शिक्षा नीति" विषय पर बुद्धिजीवियों ने अपने विचारों का आदान प्रदान किया।*
       *इस कार्यक्रम में संस्था की पिछली गतिविधियों यथा *"परीक्षा सुधार"* *की अनुशंसा जिसे तत्कालीन कुलपति ने स्वीकार किया था, के बारे में भी बताया गया।सर्वविदित है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट जनता के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वेबसाईट पर सार्वजनिक करते हुए 30 जून 2019 तक सुझाव मांगा गया था जिसे अब बढ़ाकर 31जुलाई कर दिया गया है।*
 *कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के सचिव डॉ. धनीराम जी ने कहा कि किसी भी पॉलिसी को लागू करने के लिए निर्धारित ऑब्जेक्ट होना चाहिए, ऑब्जेक्ट को प्राप्त करने के लिए मैथड होना चाहिए।सबसे महत्वपूर्ण बात जो  इस शिक्षा नीति में नजर नहीं आती कि शिक्षा का उद्देश्य क्या है और क्या और किसके लिए यह है? क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्रीय उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम है? आखिर  शिक्षा का केंद्र सरकार ने वन नेशन वन एजुकेशन की आधारशिला रखी है जो सराहनीय नहीं है। खास बात यह है कि शिक्षा राज्य की जिम्मेवारी है।वास्तव में हमारा देश भारत WTA के सिग्नेटरी मात्र बनकर रह गया है। आज शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से निजी क्षेत्र के  हाथों में आ गई है।शिक्षा मंहगी हो गई है जिसके कारण वह आमजन से दूर हो गई है।* *अनुसूचित जाति जनजाति, अति पिछड़े वर्ग के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होना निराशाजनक है। कॉन्ट्रैक्ट पर कार्य करनेवाले कर्मियों के संगठनों का आंदोलन व्यापक रूप लेनेवाला है। त्रिभाषा फॉर्मूले पर विवाद के मद्देनजर यह देखना होगा कि किस तरीके से सभी संस्कृति को समायोजित करेंगे ताकि किसी की भावना आहत न हो और कोई भी क्षेत्र यह ना महसूस कर सके कि उसके ऊपर भाषा की बाध्यता थोपी गई है। किसी भी जाति धर्म के गरीब को आरक्षण की नीति काबिलेतारीफ है।*
*शिक्षाविदों की नजर में शिक्षा के डिजिटलाईजेशन व्यापक विमर्श की आवश्यकता है।*

*दिल्ली विश्वविदयालय के रामजस कॉलेज में  राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित चर्चा कार्यक्रम के संयोजक रामजस कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. धनीराम जी थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता  डूटा के पूर्व अध्यक्ष तथा इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. श्रीराम ओबेरॉय और मुख्य वक्ता हिंदू कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रद्युम्न कुमार थे अन्य विशिष्ट वक्ताओं में अंबेडकर कॉलेज के डॉ. अजय, भारती कॉलेज की डॉ. अंजू, राजधानी कॉलेज के डॉ. संजय, हिंदू कॉलेज के डॉ. संजय, दौलतराम कॉलेज की डॉ. कामना एवम रामजस कॉलेज की पूर्व छात्रा शिवानी के साथ साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन " पुनरुत्थान ट्रस्ट" के दिल्ली के सह संयोजक गोपाल प्रसाद की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।*
        
*सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिंतक गोपाल प्रसाद ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्थान पर शिक्षा मंत्रालय किए जाने की पहल का में स्वागत करता हूं। दुःख की बात यह है कि मोदी जी के पिछले कार्यकाल के दो मंत्रियों स्मृति ईरानी एवम प्रकाश जावड़ेकर के पूरे पांच साल बीत जाने पर भी , बार बार आश्वासन के बाबजूद राष्ट्रीय शिक्षा नीति का काम अधूरा ही रह गया। वर्ष 1947 में गुरुकुल की संख्या 39567 थी जो 2019 में 34 पर सिमट गई है, जबकि वर्ष 1947 में भारत में मदरसों की संख्या मात्र 284 थी, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 42348 हो चुकी है।तुष्टीकरण की नीति को बढ़ावा देते हुए मोदी जी ने सर्वप्रथम अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजना का ऐलान कर दिया। शिक्षण संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने हेतु रचनात्मक बौद्धिक क्षमता विकास हेतु अवश्य किया जाना चाहिए। जीवनोपयोगी, रोजगारपरक, आधुनिक शिक्षा में तकनीक पर मुख्य फोकस हो। बाजार की मांग पर भी शिक्षा आधारित होनी चाहिए।* 

*भारती कॉलेज की डॉ. अंजू ने कहा कि ऑनलाइन एजुकेशन परिपूर्ण नहीं क्योंकि इससे विद्यार्थी - अध्यापक की समझ, अनुभव एवम जिज्ञासा समाधान की संतुष्टि नहीं हो पाती।शिक्षा मातृभाषा क्यों नहीं? इसमें क्या कठिनाई है? इसे कैसे दूर किया जाय? केंद्र सरकार के इस ड्राफ्ट में टीचिंग यूनिवर्सिटी, रिसर्च यूनिवर्सिटी, डिग्री यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव है। उच्च शिक्षण संस्थान स्वायत्त होना चाहिए पर भारत की संरचना के अनुसार पूर्ण स्वायत्तता भी गलत होगा। यहां लिबरल एजुकेशन एवम कमर्शियल वायवल कोर्सेज की आवश्यकता है। डिजीटाईजेशन में मानवीय अनुभूति नहीं होती। शिक्षक का छात्र के साथ वाला संबंध स्थापित नहीं होगा।* *ऑफलाइन एवं ऑनलाईन का ऑप्शन रखा जाय। ऑनलाइन व्यवस्था की सरकार की जिद से जनाक्रोश बढ़ेगा। टीचिंग और लर्निंग में प्रोफेसर की महत्वपूर्ण भूमिका के बिना संतुलित शिक्षा अधूरी रह जाएगी। हमें  शिक्षा में क्वांटिटी के बजाय क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। इसके साथ - साथ पाठ्यक्रम ठीक समय पर रिवाइज हो। भाषा के साधारण स्वरूप के बिना विद्यार्थियों को विषय आत्मसात करना अति कठिन होगा। जिस तरह का एजुकेशन हम डिलीवर कारण चाहते हैं उसके लिए वह तमाम संसाधन उपलब्ध होना चाहिए। संसाधन भी शिक्षण की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। धनी और गरीब के बीच गैप बढ़ता जा रहा है।*

*हमारी शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज के अंतिम पायदान से आनेवाले बच्चे भी ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित हो सके। शिक्षा को ज्यादा से ज्यादा सब्सिडाइज्ड करने की परम आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र संघ सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के बाद मिलेनियम डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को पूरा करने हेतु संकल्पबद्ध है।*
*इंडिया इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीराम ओबेरॉय जी ने कहा शिक्षा के प्राइवेटाईजेशन, कमर्शियलाईजेशन, कॉरपोरेटाइजेशन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार धीरे धीरे इससे अपना हाथ खींच रही है।संघीय प्रणाली व्यवस्था में शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य सरकार का विषय है। राज्य को स्कूल खोलने का अधिकार है। मुफ्त एवम अनिवार्य शिक्षा राज्य  सरकार का कर्तव्य भी है। इसके लिए ही तो शिक्षा का अधिकार (Right to Education) का प्रावधान संविधान में है। फिर केंद्र सरकार द्वारा एजुकेशन सेस का प्रावधान कतिपय उचित नहीं है। सरकार द्वारा इकठ्ठा किया गया एजुकेशन सेस कितना इकठ्ठा हुआ और कितना खर्च किया गया यह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। छह तरह का सेस लगाने का अधिकार जब केंद्र का है फिर राज्य सरकार क्यों खर्च करे? समाधान है - कट मनी कट एक्सपेंसेज। दिल्ली में नगर निगमों ने 50के करीब विद्यालयों को बंद कर दिया है। राज्य और नगर निकाय भी धीरे धीरे इससे पल्ला झाड़ रही है। सेना में भगोड़ा को गोली मार दिए जाने का प्रावधान है, पर जब राज्य भगोड़ा बन जाए तब उसे कौन गोली मारे? शिक्षा के लिए जब राज्य आधारभूत संरचना मुहैया ही नहीं कराएगा तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगा? राज्य सरकार के स्तर पर मोनीटरिंग प्रणाली एवम रेगुलेटरी बॉडी नहीं है। बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। प्राइवेट स्कूल का ऑडिट क्यों नहीं? उसका सोशल ऑडिट क्यों नहीं? निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण क्यों नहीं? जो शिक्षा के खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं हैं उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार क्यों नहीं? हम राज्य के द्वारा शासित होते हैं पर राज्य अपना दायित्व निभाने के बजाय पल्ला झाड़ रहे हैं। मौज साइबर कैफे वालों की है और मौज कोचिंग संस्थान वालों की है। ऐसा लग रहा है कि हमारी शिक्षा केवल अभिजात्य वर्ग के लिए ही रह गई है।*
*वास्तव में अपने जीवन उपयोगी सामग्री की खरीददारी कर गरीब आदमी भी टैक्स देता है,इसलिए मुफ्त शिक्षा स्वास्थ्य पाने के अधिकार से हम उसे वंचित नहीं कर सकते। वास्तव में  लर्निंग टू डू, लर्निंग टू नो, लर्निंग टू लीव टुगेदर, लर्निंग टू डेवलपिंग ही हमारे जीवन का लक्ष्य है।*

*शिक्षकों की नियुक्ति हेतु निश्चित प्रणाली नहीं है।सरकार राजनैतिक हित साधने और वोट प्राप्त करने  के लिए फैसले ले रही है।अाई. पी. यूनिवर्सिटी के 69 कॉलेज में अध्यापकों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। *एडहॉक टीचरों की तनख्वाह 84500 रुपए दिए जाने का प्रावधान है।वहां विद्यार्थियों से अंदरखाने मैनेजमेंट कोटा के नाम पर वसूली जारी है। कॉन्ट्रैक्ट टीचरों को पहले साठ हजार रुपए मिलते थे पर अब नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत चालीस हजार दिया का रहा है।*
*29 राज्यों में शिक्षा की वास्तविक स्थिति का अवलोकन एवम सर्वे किया जाय।दिल्ली विश्वविद्यालय नए कॉलेज क्यों नहीं खोल रही? जब राज्य अपना उत्तरदायित्व छोड़ेगा तब कोई ना कोई उसपर अपना अधिकार जमाएगा ही।*
          *डॉ. प्रद्युम्न कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं है। निचले तबके के लिए मुफ्त खाना होना चाहिए। हमारे यहां कितनी विभिन्नताएं हैं इसलिए भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं की जा सकती है। छात्राओं की सुरक्षा काफी महत्वपूर्ण एवम चिंतनीय है। फंड ना देना, जान बूझकर भाग जाना क्या दर्शाता है?* 
   *टेक्निकल यूनिवर्सिटी एक ही फार्मूले पर चल रही है और वह है - दो पैसा, लो मान्यता! नो सुपरविजन नो मोनीटरिंग।*
*ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि मीडिया में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बजाय नई शिक्षा नीति क्यों कहा जा रहा है?अंत में इस महत्वपूर्ण विषय पर अतिशीघ्र व्यापक विमर्श हेतु श्री जे एस राजपूत,श्री कस्तूरीरंजन,श्री अशोक श्रीवास्तव जी को आगामी कार्यक्रम में आमंत्रित करने की सहमति से प्रस्ताव पारित हुआ।* *कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. धनीराम जी ने किया।*

*मीडिया संपर्क : 9910341785*

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