Skip to main content

अमेठी से मिली प्रेरणा : गोपाल प्रसाद

अमेठी से मिली है प्रेरणा: गोपाल प्रसाद

अमेठी के सांसद राहुल गांधी के बयान से कुपित होकर मिथिलापुत्र गोपाल प्रसाद ने अमेठी को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। अब वह अमेठी एवम अवध की संस्कृति से धीरे धीरे वाकिफ हो रहा है। विशेष रूप से अवधी बोली, शब्दों के अर्थ जानने की जिज्ञासा रहती है। इसके साथ ही राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक समीकरणों , ध्रुवीकरण एवम ताना बाना को समझने हेतु प्रयासरत भी हैं।
               अमेठी से लोकसभा चुनाव का परिणाम कुछ भी आए पर अमेठी के स्वाभिमान, विकास, समस्याओं के निदान हेतु चिंतन, मनन के निमित्त संपर्क, समन्वय, संवाद और सहयोग के बल पर चुनावी परीक्षा में मैं प्रथम आया हूं , जिसके सामने 23 मई के परिणाम का मूल्य कम है।मेरे द्वारा अमेठी में किए गई जनसंपर्क के दौरान अधिकांश लोगों ने कहा कि आप पहले उम्मीदवार हो जो हमारे पास आने का कष्ट किया। हम आपको वोट देंगे और दिलवाएंगे। बड़े पार्टी के बड़े नेता तो रोड शो में व्यस्त हैं। उन्हें हमारे दुख दर्द और समस्याओं से क्या लेना?
     वास्तव में सच्ची उदारता से हमें सुख और संतोष मिलता है।समाज में हमारा आदर होता है।जो अपना नाम कमाने के लिए उदारता दिखाते हैं, उनकी उदारता सच्ची नहीं होती और न ही वे  सुख और संतोष प्राप्त कर पाते हैं। अमेठी के गौरीगंज निवासी एवम आलोक धबा के मालिक ज्ञान सिंह जी ने RSS कार्यालय हेतु लगभग पचास लाख रुपए की जमीन दान स्वरूप दे दी, लेकिन कहीं कोई प्रचार नहीं कोई प्रोपगेंडा नहीं। वहीं दूसरी ओर अमेठी के अग्रणी व्यवसायी एवम भाजपा नेता  राजेश अग्रहरि उर्फ राजेश मसाला अपना दान अपने ही तीन हजार कर्मियों को देकर वाहवाही लूटते हैं। उन कर्मियों का उपयोग भीड़ जुटाने, शक्ति प्रदर्शन, राजनैतिक उद्देश्यपूर्ति तथा दानवीरता प्रदर्शन हेतु करते हैं। इनका कोई भी दान गुप्त दान नहीं बल्कि सौजन्य से होता है। अमेठी में मुसाफिरखाना स्थित गल्लामंडी के संघर्षरत नवोदित व्यवसायी मनोज कौशल वास्तव में समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं।अब वे मुसाफिरखाना नगर पंचायत अध्यक्ष पद के आगामी चुनाव की तैयारी में जुट चुके हैं। मुझे खुशी है कि हमारे मिशन अमेठी के उद्देश्यपूर्ति हेतु इनका भरपूर सहयोग मुझे प्राप्त हो रहा है। अमेठी में प्रवास के दौरान इनका एवम इनके मित्रों का  सानिध्य हमें मिला यह हमारे लिए गर्व की बात है।
गुरु भगवान से भी बढ़कर होते हैं। उनकी बतायी गई सभी बातें हमारे लिए बहुत मूल्यवान तथा उपयोगी है। अतः हमें गुरु का सम्मान करते हुए उनकी प्रत्येक आज्ञा का पालन करना चाहिए। अमेठी में ऐसे ही गुरु एवम मार्गदर्शक हैं आरआरपीजी कॉलेज से सेवानिवृत्त भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो. अर्जुन पांडेय, डॉ. अंगद सिंह (अध्यापक एवम पत्रकार), डॉ. धनंजय सिंह चाणक्यपुरी, आरएसएस के पूर्व जिला कार्यवाह अंबिका प्रसाद त्रिपाठी, रामचंद्र तिवारी पीठीपुर, रविन्द्र पांडेय शाहगढ़, सुरेश चंद्र पांडेय भेटुआ, डॉ. सुनील कुमार शुक्ल, डॉ. भीष्म, सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. विशाल अग्रहरि, हरिशंकर जायसवाल, नेटवर्क मार्केटिंग विशेषज्ञ संतोष अग्रहरि,   देव सिंह  ग्राम प्रधान सलोन , महेंद्र सिंह मुसाफिरखाना कि कृपा से अमेठी को जानने, समझने, परखने और आगे की रणनीति बनाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इन लोगों के निर्देशानुसार मैंने अपने आप में काफी सुधार किया। इन लोगों से हमें प्रेरणा मिली कि हमें केवल अच्छे कार्यों को निरंतर करने का प्रयास करना चाहिए। गंदी आदतें जितनी जल्दी हो सके छोड़ देनी चाहिए क्योंकि बाद में उन्हें छोड़ना मुश्किल होता है। मेरा मानना है कि महर्षि दधीचि की तरह हमें दूसरों की भलाई के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देने चाहिए।
 रायबरेली में खटीक समाज के रामचंद्र सोनकर, अर्चना सोनकर, कन्हैयालाल सोनकर, एडवोकेट मनोज सोनकर जायस, महेंद्र सोनकर जायस, नन्हें सोनकर जायस आदि हमारे प्रति हमेशा चिंतित रहते हैं।
         वृक्ष कभी अपने फल नहीं खाते तथा नदी अपना पानी स्वयं नहीं पीती। ठीक इसी प्रकार दूसरों कि भलाई के लिए सज्जन जन्म लेते हैं। अमेठी में ऐसे ही सज्जनों की तलाश एवम उन्हें जोड़ने के अभियान में मैं लगा हूं।
                चीनी खाने में मीठी लगती है , किंतु डायबिटीज बीमारी देती है। नीम, गिलोय, चिरैता कड़वा होता है किंतु स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है। किसी भी सरकार द्वारा लोगों को खैरात बांटने की नहीं बल्कि योग्य, सक्षम एवम स्वाबलंबी बनाने की योजना बनानी चाहिए। आजादी के बाद से खैरात लेने की आदत बन गई है। इसमें सुधार के उपाय ढूंढने होंगे। मुझे विश्वास है कि अमेठी में लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने में एक दिन मैं अवश्य सफल होऊंगा।
        अपना परिचय तो मैं इन चार पंक्तियों में देने का प्रयास करता हूं :-
 " सूर्य में कितनी तपन है,
    अग्नि में कितनी जलन है,
        बता सकते हैं वही लोग
           जिनकी जिंदगी हवन है।"
उजाला होने के लिए तेल को जलना पड़ता है , इसी प्रकार समाज को शिक्षित  एवम विकसित होने के लिए तथा संबंधों एवम परिवार को खुश रखने हेतु कुछ लोगों को तेल की तरह जलना पड़ता है।
"हरे चरय तापय बरै ,
 फरै पसारय हाथ,
तुलसी स्वास्थ्य जगत सब परमारथ रघुनाथ"
अर्थ : प्रकृति का पौधा जब हरा होता है तो कोई भी पालतू या जंगली जानवर उसे खाने का प्रयास करता है और यदि सूख गया तो उसे लोग जलावन के रूप में जलाकर उपयोग करते हैं। ईश्वर की कृपा से यदि उसमें फल लग जाए तो फिर क्या कहना। तमाम लोग याची की तरह ललचाई आंखों से देखते हैं। भावार्थ यह है कि मृत्युलोक में जितने भी लोग हैं सब स्वार्थरत हैं, परमार्थ तो मात्र ईश्वर है।
             राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के परिप्रेक्ष्य में यह दोहा समीचीन है:-
*"चरण - चोंच- लोचन- रच्यो, चल्यो मराली चाल, क्षीर- नीर- विवरण - समय, वक उभरो तेहि काल"*
*अर्थ: एक बगुले को उसके पैर, चोंच और आंख यदि हंस की भांति बना दिया जाय और उसे हंस की भांति चलना भी सिखा दिया जाय किंतु जब दूध और पानी को अलग करने का मौका आएगा, तब वह बेचारा कैसे कर पाएगा?*
 सेवा तीन प्रकार से हो सकती है- तन से , मन से और धन से। दूसरों की सहायता करना बड़ा पुण्य है। इसमें हमें सुख व शांति मिलती है। सहायता से प्रेम, एकता तथा भाईचारे जैसे गुण स्वताह ही आ जाते हैं। हमें अपने समाज की प्रगति के लिए सेवा करनी चाहिए। यदि आप दूसरों की सेवा करेंगे तो समय पड़ने पर दूसरे भी आपकी सेवा करने से  पीछे नहीं हटेंगे। अमेठी के गौरीगंज विधानसभा अंतर्गत पलिया के प्रधान अपने क्षेत्र के लोगों के आकस्मिक उपचार कराने हेतु सारे आवश्यक कामकाज को छोड़कर कई बार लखनउ जाते देखा है। क्षेत्र के जनता के प्रति उनके सेवाभाव से में काफी प्रभावित हूं। काश ऐसी सेवाभावना अमेठी के सभी जनप्रतिनिधियों में होता!
*"तरुवर कबहुं न फल भखै*,
     *नदी न संचय नीर*,
         *परमारथ के कारणे*,
              *साधुन धरा शरीर*
बिना फल की चिंता किए कार्य करना , दूसरों की निःस्वार्थ भाव से सेवा करना , झूठ न बोलना, लालच न करना , क्रोध न करना आदि धर्म है। हमें इनका आचरण करना चाहिए। इन सभी गुणों से युक्त हैं अमेठी के धम्मौर रोड निवासी  हमारे प्रिय मित्र शशांक तिवारी।
       खजूर की तरह बड़ा होने से कोई लाभ नहीं है क्योंकि खजूर से यात्री को छाया नहीं मिलती। ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो समाज और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील हैं ही नहीं, ऐसे लोग कभी बदलाव नहीं ला सकते। मुझे उम्मीद उनसे है जो सजग हैं, जागरूक हैं, जिज्ञासु हैं, बदलाव चाहते हैं, ऐसे लोग हमारे काम के हैं। मैं इंजन जोड़ने में विश्वास करता हूं, डब्बे जोड़ने में नहीं।
          अमेठी के धम्मौर रोड निवासी आरटीआई कार्यकर्ता एवम जन सुविधा केंद्र संचालक गंगेशजी के निराशापन को आशा में परिणत करने एवं सकारात्मक भाव लाने तथा अमेठी के गौरीगंज विधानसभा अन्तर्गत कौहार ग्राम में डेयरी संचालक एवम आधार केंद्र प्रभारी विकास तिवारी से युवाओं की समस्या, खेल कूद के प्रति जनसुविधाओं का विकास तथा पुस्तकालय व वाचनालय की महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने हेतु संकल्पित हूं।
               आत्मविश्वास किसी भी कार्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। आत्मविश्वास से कार्य की निपुणता तथा निडरता आती है। अतः हमें अपने अंदर आत्मविश्वास जैसे महान गुणों को विकसित करना चाहिए।
*बुरा जो देखन मैं चला,*
*बुरा न मिलया कोय,*
*जो दिल खोजा आपुनों,    मुझसा बुरा न कोय।*
           यदि हम देश को प्रगतिशील तथा अच्छा बनाना चाहते हैं तो हमें पहले स्वयं ऐसा बनना चाहिए। हमें अपने तथा अपने आसपास के कार्यों के प्रति जिम्मेवार होना चाहिए। इसीलिए अमेठी के बड़गांव जिरहा गांव में एक ऐसे ही कार्य की जिम्मेवारी मैंने ली है। बड़े भाई एवम मार्गदर्शक सुरेन्द्र बहादुर सिंह के लगभग 56 बीघा जमीन पर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों तथा वृक्षारोपण की योजना वन विभाग तथा लखनउ के सीमैप विभाग के सहयोग से तैयार कर रहा हूं। हमने इसे आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है।
           अक्सर हम अपनी जिम्मेवारियों से भागते हैं और अपनी जिम्मेवारी दूसरों पर डालने का प्रयत्न करते हैं। यह एक गलत बात है। हमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करके देश को अच्छा बनाना चाहिए। देश के नागरिक एवम विशेष रूप से अमेठी वासियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी  के विचार पर गंभीरता पूर्वक चिंतन करना चाहिए:-
*"प्रत्येक  देशभक्त व्यक्ति की ऐसी ईच्छा होना स्वाभाविक ही है कि अपना देश वैभवशाली बने। राष्ट्र सुखी, संपन्न हो। राष्ट्रीय उत्पादन बढ़े। बेकारी, भुखमरी , बेरोजगारी, अशांति का अंत हो। न्याय सुलभ हो। आपसी झगड़े समाप्त हों। सांप्रदायिक, क्षेत्रीय, भाषायी संकुचित से ऊपर उठकर लोगों के सोचने, विचरने का तरीका हो। दलीय आस्था से नेतागण मुक्त हों। भारत अपने राष्ट्रीय स्वरूप में आर्थिक, राजनीतिक,सामाजिक, वैज्ञानिक, शैक्षणिक सभी प्रकार के क्षेत्रों में लोककल्याणकारी सिद्ध हो। जिसमें ऐसी ईच्छा निर्माण नहीं होती हो, उसे भारतीय तो क्या मानव कहना भी कठिन है।"*
            चाणक्य ने कहा था कि राज्य संचालन के लिए विरोधियों का विनाश करना और धन संचय करना आवश्यक है। अमेठी में भाजपा इसी राह पर है। विगत काफी समय से मैं  अमेठी में भाजपा एवं भाजपा के मातृजननी संगठन आरएसएस से जुड़ा। भाजपा का कार्यकर्ता था किंतु मैंने देखा कि भाजपा से जुड़े जितने भी लोग हैं, वे वर्तमान में पार्टी में अस्तित्व विहीन माने जा रहे हैं। उदाहरण की कोई आवश्यकता नहीं है। आयातित जितने  भी लोग हैं, उन्हीं पर पार्टी को विश्वास है, उदाहरणार्थ :- अमेठी के  राजेश मसाला, आशीष शुक्ला  तथा गौरीगंज के  चंद्रप्रकाश मटियारी पूर्व विधायक, विजय किशोर तिवारी, जंगबहादुर सिंह , धीरू तिवारी आदि। इन परिस्थितियों में मैंने अमेठी से  लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहा। निश्चित ही पार्टी को अच्छा नहीं लगा होगा किंतु जिन लोगों ने बहुत लंबे समय से पार्टी में योगदान किया था और उनकी विश्वसनीयता आयातित लोगों के सामने बहुत कम हो गई थी, उन सबने मुझसे भी अधिक पार्टी का विरोध किया होगा, ऐसी मेरी मान्यता है क्योंकि अभी तक ये लोग पार्टी के मूल सिद्धांतों से अवगत नहीं हैं।
              *"वहीं दूसरी ओर विदेशी मूल की सोनिया गांधी एवम उनके सुपुत्र राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा न तो भारत से परिचित हैं न भारतीयता से, न राष्ट्र से, न राष्ट्रीयता से , न संस्कृति से न संस्कार से। विदेशी मूल की सोनिया गांधी विदेशी संस्कृति की प्रतीक हैं। भारतीय राष्ट्रवाद से अलग - थलग इंदिरा - राजीव परिवार की खंडहर प्रॉपर्टी - पार्टी को संभाल रही टूटे मन वाली सोनिया गांधी भारत के मन को सहज नहीं लगती हैं।  अमेठी की जनता का भावनात्मक शोषण इस परिवार द्वारा लंबे समय से किया जा रहा है। वहीं मेरे जैसा अदना व्यक्ति एक छोटे से मिशन अमेठी अभियान में निरंतर लगा है।
*"गुलामों को उसकी गुलामी का अहसास करा दो, क्रांति स्वतः हो जाएगी।"*
प्रस्तुतकर्ता : गोपाल प्रसाद आरटीआई कार्यकर्ता एवम अमेठी से निर्दलीय प्रत्याशी हैं। आरटीआई एवम मौलिक अधिकार व कर्तव्य के बारे में लोकशिक्षण ,जनजागरण एवम जनहित से संबंधित विषयों पर सहभागिता हेतु                    इनके वाट्सएप नंबर :9910341785 तथा ईमेल : sampoornkranti@gmail.com और www.facebook.com/gopal.prasad.102, www.facebook.com/Mission Amethi पर संपर्क किया जा सकता है।

Comments

Popular posts from this blog

वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सांसद मधुकोड़ा का मामला भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया है । जिसमें ४ हजार करोड़ के घपले का पता चला है । कोड़ा का नाम भी उन राजनेताओं में जुड़ गया है जो भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाये गए हैं या घिरे हुए हैं । भ्रष्टाचार को फैलाने वाले राक्षस सत्ता में आसीन राजनीति के शीर्ष नेता हैं इसकी शुरूआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही हो गई थी । १९५६ में खाद्यान्‍न मंत्रालय में करोड़ों रूपये की गड़बड़ी पकड़ी गई । जिसे सिराजुद्दीन काँड के नाम से जाना जाता है । उस समय केशवदेव मालवीय खाद्यान्‍न मंत्री थे उन्हें दोषी पाया गया । १९५८ में भारतीय जीवन बीमा में मुंधरा काँड हुआ जिसकी फिरोज गाँधी ने पोल खोली थी । १९६४ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए “संथानम कमिटी” का गठन किया गया ।…

एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…