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राहुल गांधी को हराकर गोपाल प्रसाद को सांसद बनाने के लिए कूच करो अमेठी


हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय श्री मोहन भागवतजी के उद्बोधन के अनुरूप हिंदु राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने एवम हिंदुत्व की रक्षा करने के उद्देश्य से अखिल भारत हिंदु महासभा के घोषित प्रत्याशी के रूप में उत्तरप्रदेश के अमेठी लोकसभा चुनाव लड़ने का संकल्प किया है। आरएसएस से प्रथम वर्ष प्रशिक्षित प्राप्त करने  एवम भाजपा की सदस्यता लेने के बाद  हमें ऐसा लगा कि भाजपा अपने मूल सिद्धांतों से विमुख हो गई है। हिंदु राष्ट्र, राम जन्मभूमि, गौरक्षा, धारा 370, कॉमनवेल्थ की गुलामी से मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण एजेंडा से वह दूर भाग रही है। भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरा में आए इस परिवर्तन का हम  विरोध करते हैं। व्यक्ति आगे और पार्टी पीछे हो गईं है, जिसके कारण समर्पित और स्वाभिमानी कार्यकर्ताओं को ठेस लगी है। अतः हमने अखिल भारत हिन्दू महासभा के प्रत्याशी के रूप में संघकार्य को विस्तार देने एवम संसद में गुंजायमान करने के दृढ़ विश्वास के साथ आपके संपर्क, समन्वय, संवाद और सहयोग का आकांक्षी हूं। हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आपका स्नेह, आशीर्वाद एवम समर्थन हमें अवश्य प्राप्त होगा।
*(गोपाल प्रसाद खटीक, अारटीआई एक्टिविस्ट /अमेठी लोकसभा क्षेत्र प्रत्याशी 9910341785)*

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वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
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पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…