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सूचना का अधिकार कानून को कमजोर करनेवाले राहुल सोनिया से जनता अनभिज्ञ : गोपाल प्रसाद

सूचना का अधिकार कानून (RTI) कानून 12 अक्टूबर, 2005 को लागू हुआ था . इस कानून कि धारा- 4 के तहत 6 महीने के अंदर ही सभी सरकारी विभागों को अपने विभाग की सभी सूचनाएं अपने वेबसाइट पर डालना था , परन्तु 6 महीने की जगह 8 बर्ष बीत जाने पर भी सभी सरकारी विभागों ने इस अनिवार्य विषय का पालन नहीं किया . केन्दीय सूचना आयोग एवं सभी प्रदेशों में सूचना आयुक्तों के निर्धारित पदों पर नियुक्ति ना होना , अधूरे- गलत व समय पर सूचना नहीं देने के कारण जनसूचना अधिकारियों पर लगे दंड की वसूली ना होना, आरटीआई आवेदकों को समय पर सूचना नहीं मिलने कि स्थिति में बढ़ाते अपील आवेदनों का निपटारा न होना , जनसूचना अधिकारियों को आरटीआई सेल हेतु पर्याप्त सुविधाएं एवं कर्मचारी मुहैया ना कराए जेन के पीछे यूपीए सरकार के असली रहनुमा सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी की सोची-समझी साजिश है. वास्तव में आरटीआई को सशक्त करने तथा उसे पूर्ण अधिकार संपन्न बनाने की इनकी कोई मंशा नहीं है , क्योंकि इससे सरकारों की कलाई खुल जाएगी . सभी जांच एजेंसियों पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अंकुश लगाकर शासन एवं प्रशासन कि पारदर्शिता , शुचिता को ख़त्म करके येन-केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज रहना ही इनका मुख्य मकसद है . अपने वोटबैंक बढ़ने हेतु यूपीए सरकार के असली कर्ताधर्ता सोनिया एवं राहुल सूचना के अधिकार कानून का श्रेय तो लेना चाहते हैं पर यह भूल जाते हैं कि वास्तव में यह क़ानून उनकी चाहत और मर्जी के बदौलत नहीं बल्कि 1990 के दशक में चले विभिन्न जनसंगठनों द्वारा लम्बे आंदोलन तथा प्रसिद्द सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे , अरुणा राय , शेखर सिंह के अथक प्रयासों के बाद देश के विभिन्न अदालतों में इस हेतु सर्वाधिक रिट याचिकाओं के दायर होने पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन यूपीए सरकार को विवश होकर लागू करना पड़ा था . इस वास्तविकता से देश की जनता खासकर अमेठी- रायबरेली की जनता पूर्णरूपेण अनभिज्ञ है . केंद्र सरकार भारत निर्माण अभियान के जरिए सूचना का अधिकार कानून का श्रेय लेकर डुगडुगी बजने का प्रयास कर रही है . आरटीआई कानून के आठ साल पूर्व अस्तित्व में आ जाने के बावजूद देश की सभी जनता इस क़ानून से अवगत क्यों नहीं हो पाई है? जनता के एकमात्र कानून को प्रभावी बनाने के लिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ- साथ प्रचारित- प्रसारित क्यों नहीं किया गया ?आज सम्पूर्ण देश की जनता के साथ-साथ अमेठी- रायबरेली की जनता को यह जानने का हक़ है की सच्चाई क्या है? राजीव गांधी फाउंडेशन , नेहरु- इंदिरा से सम्बंधित ट्रस्टों के आय-व्यय , विकास कार्य व उपलब्धियों को सोनिया एवं राहुलजी स्वयं पहल कर आम जनता को बताएँ . क्या इससे सम्बंधित सम्पत्तियाँ उनकी निजी जागीर है? सम्पूर्ण सांसदकाल के दौरान इनके सांसद निधि कोष द्वारा किए गए खर्च , नहीं उपयोग की गई राशि , पूर्ण कार्य व अपूर्ण कार्य की भी जानकारी दिया जाना चाहिए, ताकि लोगों को इस सम्बन्ध में सूचना मांगना ही ना पड़े . ऐसा करने पर उनकी विश्वसनीयता निश्चित रूप से बढ़ेगी . अमेठी -रायबरेली की जनता को राहुल गांधी व सोनिया गांधी से सम्बंधित इन महत्वपूर्ण बिषयों की जानकारी व सूचना का ज्ञान अवश्य होना चाहिए . अमेठी में जागरूक नागरिक मंच के संयोजक अम्बिका प्रसाद त्रिपाठी , ऑल इंडिया मुस्लिम फेडरेशन के अमेठी जिलाध्यक्ष अब्दुल रहमान , युवा विकास संस्थान अमेठी के अध्यक्ष विकास तिवारी , पत्रकार रामशिरोमणि पाण्डेय , त्रिलोकचंद्र , रत्नेश मिश्र , विनोद शर्मा "सागर" , अमित कुमार पाल , सौम्य सिंह आदि ने तो गोपाल प्रसाद द्वारा चलाए गए सूचना का अधिकार जागरूकता अभियान को अमेठी के सम्पूर्ण इलाके में पहुंचाने का संकल्प भी लिया है .

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