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Activists criticise govt, parties for change in RTI Act

New Delhi, Aug 2 (UNI) Social and RTI activists today slammed the government and political parties for their move to amend the Right To Information Act to keep political parties out of the purview of transparency law. The government yesterday obtained the Cabinet approval to amend RTI Act to keep political parties out of the purview of Act. The Central Information Commission (CIC) had in a ruling in June said six national parties- the BJP, the Congress, NCP, BSP, CPI and CPI(M) had the character of a public authority under the Right to Information Act so they were required to appoint public information officers. Noted RTI activist Subhash Chandra Agrawal said if the government moved to keep political parties out of purview of the RTI Act, then the parties should withdraw all the government facilities. ''Morality and ethics (which do not exist in political community) demand that bill to keep political parties out of purview of RTI Act must be pre-conditioned that they will have to return land and bungalows allotted to them by Union and state governments at subsidised rate and lease,'' Mr Agrawal said. He said tax-concessions available to the political parties should also be abolished. ''The said legislation should make all co-operative societies including multi-state-co-operative societies (MSCS), Public-Private-Partnerships (PPP) and all national-level sports-federations including BCCI to be covered under RTI Act,'' he said. Mr Agrawal said all those getting land and accommodation from governments at subsidised lease/rate etc should be declared as public authorities under RTI Act. He said considering dominating role of private sector on day-to-day aspects of public life like telecommunications and banking, private sector above certain specified turn-over should also be brought under RTI Act. ''Unanimity among political parties is quite usual whenever their mutual interests are involved, and naturally these are against public interests,'' he commented. He also slammed the political parties their option to undo Supreme Court verdicts on tainted ones entering the legislature by asserting supremacy of Parliament. ''Apprehensions about ruling parties misusing Supreme Court verdict on poll-eves against their political opponents are valid. But instead of totally negating Supreme Court verdict, some effective remedy should be legislated to practically free legislature from criminals,'' he said. ''No Parliamentarian will ever invest on a poll gamble for public welfare by investing like rupees eight crores on Lok Sabha election and ‘buying’ a Rajya Sabha seat for rupee 100 crore. These are investments for minting money out of corruption,'' Mr Agrawal added. He stressed on the need of a massive poll reform including Right to Reject. ''But will our law makers clip their own wings by accepting long pending Election Commission recommendations in this regard?''he asked. Another noted RTI activist Gopal Prasad opposed the Centre's move on the Act saying RTI activists from across the country would launch a movement against this. ''The government's step is against transparency. Why political parties are opposing implementation of RTI Act on them. People of the country have right to know about funding of the parties and its sources,'' Mr Prasad said. Mr Prasad, who is also General Secretary of RTI Activists' Association, said he will talk to other organisations working on RTI Act to chalk out a strategy against the government's move. ''I will also write to BJP president Rajnath Singh and senior party leaders within a day or two on the issue. The BJP should think over it as the party always talks about corruption and transparency,'' he added. Mr Prasad said the RTI activists are considering to move to court against the government's step. https://10.200.201.253/eng/edit.asp?mystory=main&mystoryd=02&myid=27984

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