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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सूचना सही नहीं

भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण की सूचना सही नहीं है क्योंकि सरकारी वेबसाईट nic .in ने इसका समय पर अपग्रेडेशन ही नहीं किया है .सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तो मात्र एक उदाहरण है , इस तरह के कई ऐसे मंत्रालय/विभाग हैं, जिनके वेबसाईट का समय पर अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बाबजूद अपग्रेडेशन की गति कछुआ चल की भांति एवं पुरानी तकनीक पर ही आधारित है. nic .in समय पर अपग्रेडेशन हेतु सक्षम नहीं है. विश्वसनीय सूत्र के अनुसार nic कई विभागों को स्वयं समाधान देने के बजाय अपने पैनल के आईटी कंपनियों की सेवा की संस्तुति कर रही है, जो एक लम्बी प्रक्रिया है. पुरानी एवं गलत सूचना या जानकारी होने से आम नागरिक के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई चिट्ठियों को विभाग द्वारा इसलिए वापस भेज दिया जाता है, क्योंकि वह पुराने अधिकारी / कर्मचारी के नाम प्रेषित होता है.कई अधिकारियों के नाम स्थानांतरण एवं सेवानिवृति के वाबजूद वेबसाईट में प्रदर्शित अधिकारियों की लिस्ट में शोभा बढ़ा रहे हैं. इससे सम्बंधित विभाग की अकर्मण्यता , गैर जिम्मेदारी तथा व्यवस्था में त्रुटि की झलक दिखाई देती है. उदाहरण स्वरुप सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के गीत एवं नाटक प्रभाग की वेबसाईट में ड्रामा की जगह पर रामा दिखाया जा रहा है. उप निदेशक प्रशासन के पद पर वरेआम मस्त को दिखाया जा रहा है , जबकि वे काफी पहले सेवानिवृत हो चुके हैं , वर्तमान में इस पद पर सहायक निदेशक प्रशासन निखिलेश चटर्जी पदस्थापित हैं . डा. विजय राघवन उप निदेशक एस एंड एल का तबादला हो चुका है. बी पाल चौधुरी उप निदेशक पी एंड सी का कोलकाता तबादला हो चुका है और इस पद पर ध्रुव अवस्थी पदस्थापित हैं . बलजीत सिंह सहायक निदेशक का भी चंडीगढ़ तबादला हो चुका है , जबकि मौजूदा सूची में अभी तक उनका नाम हटाया नहीं गया है . उप निदेशक (दिल्ली क्षेत्र) सुरेन्द्र प्रसाद एवं सहायक निदेशक मनोज बंसल का नाम तो है ही नहीं.
इस संबध में सूचना के अधिकार कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी परन्तु दो माह बीत जाने के बाबजूद भी उन्हें उत्तर नहीं दिया गया है . वे कहते हैं की इससे सरकार के तंत्र एवं कार्यशैली का पता चलता है. प्रशासनिक सुधार एवं पारदर्शिता आज समय की मांग है , जिस ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

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