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कैसे करें भ्रष्टाचार का सामना ? --गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट

भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना हजारे के आमरण अनशन रुपी शंखनाद के बाद दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक विचार गोष्ठी में "भ्रष्टाचार का सामना कैसे करें" विषय पर चर्चा हुई. "आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया " के महासचिव गोपाल प्रसाद ने कहा कि यूपीए सरकार अब तक की सबसे भ्रष्टतम सरकार है. वास्तव में सोनिया गाँधी ने संसद, प्रधानमंत्री को हाईजैक कर लिया है . राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NAC ) बनाकर अपनी महत्ता साबित करने तथा मंत्रीमंडल को पंगु करने के सिवा इसका कोई दूसरा काम नहीं है.जनता अब पहले के बनिस्पत जागरूक हो चुकी है. भ्रष्टाचार और कमरतोड़ मंहगाई ने जनता का जीना मुहाल कर रखा है. देश की जनता की पीड़ा अब असहनीय हो चुकी है और उसे अब हर हाल में बदलाव चाहिए . प्रख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव के कालाधन को वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण के बाद जनता पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है. बाद में भाजपा द्वारा संसद के बाहर एवं संसद के भीतर आन्दोलन चलाने के बाद इस मुहिम ने और रंग पकड़ा. निराश जनता के मन में आशा की किरण प्रस्फुटित हो गई. तीसरे चरण में अन्ना हजारे के आमरण अनशन की घोषणा ने बाकी की कोर कसर पूरी कर दी . सम्पूर्ण देश के प्रायः सभी इलाकों से छात्रों, नौजवानों, युवतियों, बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं एवं विकलांगों ने अपना पूरा समर्थन दिया ,जो स्वतः स्फूर्त था. यह कोई प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था ,बल्कि हर वर्ग ,हर धर्म, हर संप्रदाय ,हर क्षेत्र के दिल की भड़ास था . जिसके कारण केंद्र ही नहीं विभिन्न राज्य सरकार की सत्ता भी हिलने लगी थी, तभी तो सभी नेताओं ने इस आमरण अनशन को शीघ्र तुडवाने का आग्रह किया था और सोनिया गांधी एवं प्रधानमंत्री को भी इनके लोकपाल बिल की मांग को स्वीकार करना पड़ा . पिछले महीने भारत के प्रधानमंत्री से हमने लालकिला के प्राचीर से किए गए घोषणाओं एवं उनके क्रियान्वयन के सम्बन्ध में सूचना का अधिकार अधिनियम(RTI ) के तहत जानकारी मांगी थी. प्रधानमंत्री कार्यालय के जबाब के अनुसार प्रधानमंत्री का काम घोषणा करना होता है ,उनका क्रियान्वयन नहीं. हालाँकि योजनाओं के क्रियान्वयन की रिपोर्ट दी गई थी ,परन्तु वह संतोषप्रद नहीं था. इससे यह तो साफ झलक गया कि समन्वय की कितनी कमी है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने एवं उसकी मॉनीटरिंग हेतु क्या -क्या उपाय प्रधानमंत्री ने किये हैं ,के सम्बन्ध में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री द्वारा पिछले बर्षों में दिए गए भाषणों की प्रतिलिपि भेज दी गई , जब प्रधानमंत्री कार्यालय का यह हाल है तो देश के अन्य मंत्रालयों का अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं. योजना आयोग के निदेशक ने तो हमारे आरटीआई प्रश्नों के जबाब में वेबसाईट देखने और किताब पढ़ने की सलाह दे डाली. योजना आयोग के अफसर एसी कार्यालय में रहकर योजना बनाते हैं , उन्हें जमीनी हकीकतों का कितना ख्याल होगा?केंद्र सरकार के ही एक मंत्री ने इसपर योजना आयोग का मखौल उड़ाया था. जन बूझकर भ्रष्टाचार के जाँच हेतु बनी संस्थाओं को सशक्त एवं अधिकार संपन्न नहीं बनाया जाता है क्योकि सरकार की नीति और नियति दोनों में ही खोट है. कालाधन,बोफोर्स घोटाले ,भोपाल गैस कांड के अभियुक्त एंडरसन के प्रत्यर्पण , कॉमनवेल्थ, आदर्श सोसाईटी , टूजी स्पेक्ट्रम आदि मामलों में सरकार के रवैयों की पोल खोल दी है. हमें आशा ही नहीं विश्वास है कि भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए अन्ना हजारे द्वारा पेश किए गए बिल के द्वारा ही नकेल कसी जा सकती है, बशर्ते कि इसमें जनता की नुमाइन्दगी करने वाले भ्रष्ट नेताओं के जैसा आचरण न करने लगे. इस बिल के सख्ती से लागू होने के बाद भारत को सशक्त एवं समृद्ध बनने से कोई नहीं रोक सकता है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. कलाम के सपनों के भारत की सार्थकता तभी संभव हो सकती है. गैरसरकारी संस्था "अभियान " के अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने कहा कि सब लोग कुछ न कुछ अलग -अलग कर रहे थे . मेरा यह प्रयास है कि सर्वप्रथम मैं को हम करें. उड़ान फाउँडेशन के संजय गुप्ता ने पूर्वी दिल्ली की अनेक समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ही भू माफिया, पार्किंग माफिया एवं शराब माफिया का वर्चश्व बढ़ गया है. काफी लिखने-पढ़ने के बाबजूद भी कारवाई नहीं होती है. उससे भी दुखद बात यह है कि लोग आगे आने के लिए तैयार नहीं होते. पर्सनालिटी डेवलपमेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने कहा कि सिस्टम को ठीक करने की चुनौती आज एक यक्ष प्रश्न है. उसके लिए दूरदर्शी सोंच, आगे की कार्ययोजना और वास्तविक उपलब्धि महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी. बिभिन्न स्कूल -कालेजों में सेमिनार, डिबेट आयोजित कर जनजागरूकता को बढ़ावा देना होगा. आज अमेरिका सम्पूर्ण विश्व में अपना दबदबा कैसे बना रहा है ,यह हमें समझाना होगा.वास्तविक विकास हेतु मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है. अतः दकियानूसी मानसिकता पर प्रहार कर उत्कृष्ट मानसिकता लानी होगी ,जो सम्पूर्ण देश के हित में हो. "स्मार्ट डज स्मार्ट" नामक पुस्तक का जिक्र कर उन्होंने कहा की देश के हर जागरूक नागरिक को स्मार्ट पैरेंटिंग का उत्तरदायित्व निभाना होगा. सवर्ण शक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि जड़ अयोग्यता में है . योग्य व्यक्ति आए तभी भ्रष्टाचार रूकेगा. बालाकृष्णन , थॉमस ,दिनकरण आदि को पदस्थापना जातिवाद के कारण ही मिली जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला .इसलिए जिसमें योग्यता है उसे ही आगे लाया जाए. इंजीनियर चंद्रकांत त्यागी ने कहा कि शिव खेडा के आह्वान पर "हम कुछ कर सकें " की भावना के तहत ऐसी सोसाईटी को कॉल किया था ,जो चेंज चाहती थी. शिव खेडा के पार्टी से त्यागपत्र देने के बाद तेजेंद्रपाल त्यागी के नेतृत्व में हम आज भी यह लड़ाई लड़ रहे हैं. विदेशी लोग यहाँ आते हैं ,जिनका सामना यहाँ भ्रष्टाचार से होता है . वास्तव में देश की 80 % जनता इससे प्रभावित है . देश के अधिकाश भाग में आज भी मूलभूत सुविधाएँ नहीं है. हमें समस्याओं पर बातचीत के बजाय ,उनमें से एक समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए. शुरुआत एक की करें , तभी कुछ बदलाब हो सकता है. हम ऐसी सिस्टम डेवलप करें जो बता सके कि कौन अयोग्य है. मजदूरों कि समस्याओं (ESI ,PF , तथा प्रॉपर मेडीसिन नहीं मिलना ) पर काम करने की आवश्यकता है. सवर्ण शक्ति पार्टी के महासचिव सुभाष शर्मा ने कहा कि वार्ड पार्षद , विधायक ,संसद बनकर बदलाब लाना पड़ेगा. टी.एन.शेषण के कार्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सबको कुछ न कुछ बनाना पड़ेगा तभी क्रांति आएगी. बहुजन समाज पार्टी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि बहनजी को पैसा देकर टिकट प्राप्त करनेवाला क्या जनता से मतलब रखेगा? टूल आने के बाद ही चेंज करने की परिकल्पना साकार हो सकती है. ऐसे कार्यक्रम बनाना पड़ेगा ,जो लोगों के लिए तथा लोगों को समझाने लायक हो. लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सत्ता प्राप्त करके ही व्यवस्था परिवर्तन संभव हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट के युवा अधिवक्ता संदीप दुबे ने चाणक्य नीति एवं नन्द वंश के समूल खात्मे के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि हमें चन्द्रगुप्त तैयार करना पड़ेगा,छोर पकड़ना पड़ेगा. सबसे उपयुक्त फार्मूले का क्रियान्वयन हो तथा हम दिखें न दिखें मुट्ठी दिखनी चाहिए. भूखे चाणक्य के आग्रह पर बुढ़िया द्वारा परोसे गए गरम खाने के दौरान चाक्य के हाथ जल जाने पर बुढ़िया द्वारा दी गए जबाब " तुम्हें गरम भोजन को ग्रहण करने की विधि भी नहीं मालूम , इसे किनारे से खाना पड़ता है" का उदाहरण अपने आप में एक महत्वपूर्ण सन्देश है. बूढा बगुला का कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि धूर्त बूढ़े बगुले ने कुछ दिनों तक मछलियों को नहीं खाया और बाद में एक- एक करके सभी मछलियों को दूसरे तालाब में ले जाने के बहाने खा गया. केकड़ा को इसी प्रकार ले जाने पर केकड़ा ने कहा कि हम तो तुम्हारे गर्दन पर ही जाएँगे. जंगल में मछलियों के ढेर सारे कांटे देखने पर केकड़ा ने बगुला का गर्दन पकड़ लिया. अंत में उन्होंने कहा कि धूर्त बगुला के विलाप में न पड़कर किसी एक को तो केकड़ा बनना ही पड़ेगा. आईये भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपने प्रयासों को एकसूत्रित कर भारत को सशक्त करने में अपना योगदान दें.

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