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लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्होंने कहा की आज आरटीआई को गाँव तक एवं देश के अंतिम पायदान पर खड़े जमात तक पहुँचाने की आवश्यकता है. इसे पूरा करने हेतु उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की .उन्होंने कहा की इंडिया ऑन फोन के हेल्पलाइन नंबर 9891919135 पर देश के किसी भाग का नागरिक अतिशीघ्र आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है .नई टेक्नोलोजी के बिना आरटी आई आन्दोलन की गति तेज एवं प्रभावी नहीं हो सकती है. सोशल कम्युनिटी साईट फेसबुक पर सूचना का अधिकार कम्युनिटी चलनेवाले न्यूज प्रोड्यूसर हसन जावेद ने आरटीआई के बढ़ते प्रभाव एवं ब्यूरोक्रेसी की मानसिकता को बड़े अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया. पर्सनालिटी डेवलप[मेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने अमेरिका एवं चीन के अग्रणी रहने का उदहारण देते हुए कहा की अगर हमें पारदर्शिता चाहिए तो सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. हमें अग्रणी बनाने हेतु आक्रामक भूमिका में आना होगा तभी हम वर्तमान भ्रष्ट व्यवस्था से लडाई लड़ सकते हैं. संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद ने आरटी आए क्षेत्र के अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान प्राप्त अनुभव एवं कठिनाईयों पर प्रकाश डाला . अपने संबोधन में उन्होंने कहा की आरटीआई ड्राफ्टिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिसे सीखने एवं सिखाने की आवश्यकता है. जब तक प्रश्न पूछने की कला नहीं आएगी तब तक आपको सही जबाब नहीं मिलेगा. आरटी आई के प्रश्नों में क्या, कब, कहाँ ,कैसे क्यों आदि प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करने के बजे उसे जानकारी का रूप देकर बगैर प्रश्न वाली शैली में प्रयोग किया जाना चाहिए, अधिकांश लोग ऐसी गलती किया करते हैं. उन्होंने कहा की उनके संस्था गठन करने का लक्ष्य सर्वप्रथम आरटीआई एक्टिविस्टों के अधिकार की लड़ाई लादना है. इसके लिए सर्वप्रथम सामूहिक प्रयास से अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ आरटीआई आवेदकों को दिलाना है . इस हेतु तंत्र विकसित कर आरटीआई क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण एवं जनजागरण के अतिमहत्वपूर्ण पक्ष की चुनौती संस्था वहन करेगी .अतिशीघ्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राज्य समन्यकों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के राजधानी में आरटीआई विषयों पर विचारगोष्ठी एवं सम्मलेन आयोजित की जायेगी व्यवस्था से पीडीत लोग ही आन्दोलन का हिस्सा बन सकते हैं . लोगों को उसके नैतिक कर्त्तव्य के साथ-साथ अधिकार के बारे में जानकारी देने पर स्वतः क्रांति हो जायेगी. उन्होंने कहा की कौन कहता है की जयप्रकाश नारायण मर गए?आज जयप्रकाश नारायण आरटीआई एक्टिविस्टों के रूप में तथा उनका सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन आरटीआई आन्दोलन का नया स्वरुप है जो अब रंग ला रहा है. संस्था के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा की देश के ज्यादातर आरटीआई एक्टिविस्ट माध्यम वर्ग के ही हैं . उन्होंने लॉयर्स ऑफ़ द वर्ल्ड एसोसिएशन संस्था एवं आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के एक साथ रणनीति बनाने पर बल दिया तथा कहा की वे इसके लिए आगे विचार -विमर्श करेंगे ताकि इसे शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके. . इंडियन इंस्टीचयुट ऑफ़ पोलिटिकल लीडरशिप के निदेशक शाहनवाज ने आरटीआई एक्टिविस्टों को दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया . अपने वक्तव्य में उन्होनेव कहा की वे आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर लम्बी दूरी तय करने के प्रति आशान्वित हैं. संस्था के चेयरमैन धनीराम एवं संरक्षक अनिल कुमार मित्तल ने जनहित की भावना से आरटीआई फाईल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. तृप्ति सोनकर के सरस्वती वंदना एवं अलीगढ के कवी एवं पत्रकार गाफिल स्वामी द्वारा भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविता को मुक्तकंठ से सराहना मिली.

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