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राष्ट्र निर्माण के परिप्रेक्ष्य में १९ वां राष्ट्रमंडल खेल ,२०१०




राष्ट्रीय विचार मंच एवं अनुव्रत महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की १३५ वीं जयंती के अवसर पर आयोजित "राष्ट्र निर्माण के परिप्रेक्ष्य में १९ वां राष्ट्रमंडल खेल ,२०१० विषय के संगोष्ठी की अध्यक्षता पदमश्री श्याम सिंह शशि ,विषय प्रवर्तन राष्ट्रीय विचार मंच के संरक्षक एवं विचार दृष्टि पत्रिका के संपादक सिद्धेश्वर जी ने की. संगोष्ठी में मुख्य रूप से गाँधी प्रतिष्ठान के सचिव सुरेन्द्र कुमार ,नगरी लिपि परिषद् के मंत्री डा. परमानंद पंचाल, अनुव्रत महासमिति के संयुक्त मंत्री बी एन पाण्डेय ,लोक सभा सचिवालय के उप सचिव नवीन कुमार झा ,आर.टी. आई एक्टिविस्ट गोपाल प्रसाद ,सामाजिक कार्यकर्ता डा. प्रसून प्रमुख रूप से उपस्थित थे .समारोह का उदघाटन जयपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डा. नरेन्द्र शर्मा "कुसुम" ने की. अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय विचार मंच के सचिव प्रो. पी. के. झा "प्रेम" तथा विचार दृष्टि पत्रिका के संपादक उपेन्द्र नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर विचार दृष्टि पत्रिका के "राष्ट्रमंडल खेल -2010 विशेषांक का लोकार्पण पदमश्री डा . श्याम सिंह द्वारा किया गया. सभी वक्ताओं ने राष्ट्रमदल खेल से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं पर अपनी चिंताएं व्यक्त की.
आर.टी.आई एक्टिविस्ट गोपाल प्रसाद ने इस अवसर पर कहा की राष्ट्रमंडल खेल में बिहार पीछे रह गया ,इसका मुझे खेद है. इस खेल में तमाम विज्ञापनों में हिंदी की घोर उपेक्षा की गयी और पाश्चात्य देश की सभ्यता संस्कृति को बढ़ावा दिया गया,जो शर्मनाक है. भारत के खेल बाजार की घोर उपेक्षा कर विदेश से वे सामान भी आयत कर मंगाए गए जो देश में उपलब्ध थे, इसका क्या अर्थ है? देश के खेल एवं खिलाडियों को बढ़ावा देने के लिए क्या किया गया?उन्होंने अपने उद्बोधन में आर.टी. आई में हिंदी का प्रयोग और जन सूचना अधिकारी से हिंदी में जबाब देने के आग्रह का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा की आज समय आ गया है की हम अपनी जिम्मेवारियां समझें तथा आम हित की भावना से राष्ट्रीय मुद्दों एवं ज्वलंत समस्याओं पर आर.टी.आई फाईल करे. आज राष्ट्रमंडल खेल के जांच की मॉनिटरिंग और जिम्मेवार से रकम वापस सरकारी कोष में लाने के लिए वे प्रयासरत हैं.

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