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यामाहा ने भारत में अपनी स्पोर्टी इमेज को और पुख्ता किया

मोटो जीपी वर्ल्ड चैम्पियन वैलेन्टीना रॉसी को पहली बार यामाहा भारत लाई
-इंडिया यामाहा के ब्रांड ऐम्बैसडर जॉन अब्राहम के साथ बातचीत करते हुए वैलेन्टीनो रॉसी ने यामाहा के साथ अपने खास रिश्ते के बारे में बताया -

इंडिया यामाहा मोटर प्रा. लि. ने आज अंतरराष्ट्रीय मोटर स्पोर्ट में अपनी लीडरशिप को मजबूती से जाहिर किया । कंपनी ने इस खेल के सबसे बड़े सितारे वैलेन्टीनो रॉसी को आज पहली बार भारतीय बाइक प्रेमियों से रूबरू कराया । कंपनी ने यह ताजा कदम अपनी वैश्‍विक योजनाओं में भारत के महत्व को रेखांकित करने के लिए उठाया है । इसी दिशा में काम करते हुए इससे पहले यामाहा दुनिया भर में मशहूर अपने मॉडल वीमैक्स (१,६७९सीसी), वाईजैड‍ऐफ-आर१ (९९८सीसी) तथा ऐमटी०१ (१,६७०सीसी) को भारतीय बाजार में लांच कर चुकी है । अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोटो जीपी वर्ल्ड चैम्पियन वैलेन्टीनो रॉसी ने भारतीय बाइकिंग आइकॉन तथा इंडिया यामाहा के ब्रांड ऐम्बैसडर जॉन अब्राहम के साथ दिलचस्प बातचीत में यामाहा के साथ अपने खास रिश्ते के बारे में बताया । रॉसी ९ जनवरी को ऑटो ऐक्सपो में अपने प्रशंसकों से मिलने आए तथा उन्होंने यामाहा के स्टॉल पर जाकर शानदार मोटरसाइकिल रेंज कर जायजा लिया ।
इस अवसर पर इंडिया यामाहा के सीईओ प्रबंध निदेशक श्री युकिमीने सूजी ने कहा, “इंड़िया यामाहा मोटर के लिए भारत में वैलेन्टीनो रॉसी का स्वागत करना बहुत फख का मौका है । दुनिया भर में हमारे ब्रांड को मोटर स्पोर्टस्‌ के लिए जाना जाता है और हम भारत में भी रेसिंग संस्कृति आरंभ कर चुके हैं । तथा अब हम और बड़े स्तर पर भारत में मोटर स्पोर्टिग की संस्कृति को दोहराने की तैयारी कर रहे हैं । वैलेन्टीनो रॉसी अंतरराष्ट्रीय मोटर स्पोर्ट में एक बड़ा नाम है तथा वे पहली बार भारत आए हैं । यहां आने पर उन्हें जिस प्रकार की जोरदार प्रतिक्रिया मिली है उससे मालूम चलता है की भारत में कितनी बड़ी संख्या में लोग इस खेल के दीवाने हैं । जितना उत्साह हमें यहा देखने को मिला है वह हमारे आब तक के सभी अनुभवों से कहीं बढ़कर है । ”
इंड़िया यामाहा के ब्रांड ऐम्बैसडर जॉन अब्राहम ने कहा, “मैं खुद वैलेन्टीनो रॉसी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ तथा मैं ने उनके रेसिंग कैरियर पर ध्यान रखा है । मुझे याद है जब मैं उनसे बरनो ग्रां प्री में २००५ में मिला था और आज यहां उनसे फिर मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है । यह मोटर स्पोर्टिग कल्चर और इससे जुड़ा उत्साह ही है जो ब्रांड यामाहा से मेरे रिश्ते को मजबूत बनाता है । मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैं भी उसी ब्रांड से जुड़ा हुआ हूं जिसके साथ वैलेन्टीनो रॉसी जैसे मशहूर बाइकर जुड़े हुए हैं । यामाहा के साथ मेरा रिश्ता बहुत खास है तथा मैं इस ब्रांड के साथ और नजदीकी से काम करने की उम्मीद करता हूँ । ” यह वक्‍त यामाहा के लिए बहुत अहम है । कंपनी ने भारत के लिए जो योजनाएं बनाई हैं उन पर वह जोरदार तरीके से अमल कर रही है । यामाहा भारत में बाइकिंग की संस्कृति को अगले स्तर पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और रॉसी का भारत आना इसी दिशा में एक कदम है ।
विश्‍व चैम्पियनशिप में रॉसी की आमद १९९६ में मलेशियन ग्रां प्री के जरिए हुई और उन्होंने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में एक जीत के साथ नौवां स्थान पाया । १९९७ में उन्होंने १२५सीसी वर्ल्ड चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया और इस श्रेणी में सबसे कम उम्र के प्रतियोगी बने, उन्होंने ऐप्रिलिया के साथ ११ रेस जीती ।
२००४ में यामाहा के साथ जुड़कर रॉसी ने इतिहास कायम किया और उन्होंने सीजन-ओपनिंग ग्रां प्री में विजय हासिल की । उन्होंने १६ में से ९ रेस जीतीं और फिलिप आइलैंड में ग्रां प्री में विजय के साथ १२ सालों में पहली बार यामाहा के लिए विश्‍व चैम्पियनशिप का खिताब जीता । २००५ में रॉसी का दबदबा देखने को मिला उन्होंने ११ रेस जीती तथा यामाहा को मैनुफैक्चरर्स व टीम के खिताब जितवाए । २००६ में उन्होंने ५ रेस जीतीं तथा ५ पोल पोजिशन हादिल की, यह कारनामा किसी भी अन्य प्रतियोगी से बढ़ कर था । ९ जीतें, १६ पोडियम (दोनों ब्रेकिंग रिकॉर्डस्‌) और यामाहा वाईजैड‍आर-ऐम१ के साथ वर्ग में उनका छठा तथा कुल ८ वां क्राउन, इन सब के साथ ‘द डॉक्टर’ के नाम से मशहूर रॉसी ने खुद को २००८ में अब तक के सबसे महान मोटोजीपी रेसर के रूप में स्थापित कर दिया । रॉसी ने वर्ष २००९ में ग्रां प्री मोटरसाइकिल रेसिंग के इतिहास में अपना नाम पक्‍का कर दिया, उन्होंने प्रीमियर क्लास में ७वां और यामाहा के लिए चौथा टाइटल जीता जो की किसी भी अन्य निर्माता के मुकाबले ज्यादा बार है ।
१९५५ में जब से यामाहा की स्थापना हुई है तब से रेसिंग इसके दिल में है । यामाहा ने रेसिंग की दुनिया में कई मुकाम हासिल किए हैं, जैसे पहली जापानी कंपनी जिसने ५०० सीसी ग्रां प्री जीती (१९७३ में यारनो सारीनेन के साथ), ५००सीसी विश्‍व खिताब जीतने वाली पहली जापानी कंपनी (१९७५ में जाकमओ अगोस्तीनी के साथ) पहली बार कोई टू-स्ट्रोक मशीन प्रीमियर क्लास में जीती थी । टू-स्ट्रोक रेसरों की एक पीढ़ी की अगुआई करने के बाद अब यामाहा नई पीढ़ी की फोर-स्ट्रोक मशीनों का इस्तेमाल कर रही है, जिस पर सवार होकर स्टीफन ऐवर्टस्‌ वर्ल्ड चैम्पियनशिप मोटोक्रॉस पर दबदबा बनाए हुए हैं और २००१ से २००६ के बीच ६ खिताब जीत चुके हैं ।
इंडिया यामाहा मोटर प्रा. लि. के बारे में
यामाहा ने १९८५ में भारत में अपने कारोबार की शुरूआत की । यामाहा अगस्त २००१ से यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड, जापान ( YMC ) के तहत उसकी १०० प्रतिशत पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी के तौर पर काम कर रही है । २००८ में मितसुई एंड कंपनी लिमिटेड ने वाईऐमसी के साथ एक करार किया और ‘इंडिया यामाहा मोटर प्रा. लि. (IYM) के मोटर साइकिल निर्माण कंपनी में सह निवेशक बन गई ।
इंडिया यामाहा मोटर प्रा. लि. की आधुनिक निर्माण ईकाइयां सूरजपुर (उ.प्र.) एवं फरीदाबाद (हरियाणा) में स्थित हैं । इन फैक्ट्रियों में घरेलू व निर्यात दोनों बाजारों के लिए मोटरसाइकिल उत्पादन किया जाता है । २००० से अधिक कर्मचारियों वाली यह कंपनी अपने ग्राहकों का खास ख्याल रखती है । इसका देश भर में ४०० से ज्यादा डीलरों का नैटवर्क है । वर्तमान में इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं- वीमैक्स (१६७९सीसी), ऐमटी०१ (१६७०सीसी), वाईजैड‍ऐफ-आर१ (९९८सीसी), फेजर (१५३सीसी), ऐफजैड-ऐस (१५३सीसी), ऐफजैड१६ (१५३सीसी), वाईजैड‍ऐफ-आर१५ (१५०सीसी), ग्लैडिएटर टाइप ऐस‍ऐस व आर‍ऐस (१२५सीसी), जी५ (१०६सीसी), अल्बा (१०६सीसी) और क्रक्स (१०६सीसी) ।

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