Skip to main content
कम खर्च में ज्यादा लाभ का सुनहरा अवसर

प्रिय महोदय,

भारत की राजधानी दिल्ली में अपने व्यापारिक अनुभवों से आप अवश्य परिचित होंगे । जिन कंपनियों/संस्थाओं के यहाँ कार्यालय या प्रतिनिधि नहीं है, वे दिल्ली से प्राप्त होने वाले व्यापक व्यापारिक संभावनाओं से वंचित हैं । ऐसी कंपनियों/संस्थाओं के लिए हम अपनी सेवाएँ आपके बजट के अनुरूप दे सकते हैं ।
आज हर कंपनियों/संस्थाओं के समक्ष प्रचार-प्रसार एवं समन्वय का संकट है । इसके अभाव में आप प्रतिस्पर्धी कंपनियों को चुनौती एवं अपने अस्तित्व की रक्षा नहीं कर सकते । इस महत्वपूर्ण सच्चाई को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यवसायियों के प्रगति हेतु हम मीडिया समन्वयक ( Media Co-ordinator), कार्यक्रम समन्वयक ( Event Co-ordinator), लायजनिंग प्रतिनिधि ( Liaisoning Agent) के रूप में आपके विभिन्‍न समस्याओं का समाधान कर सकते हैं । हम आपके व्यवसाय और बाजार की संभावना के मध्य मजबूत धुरी के रूप में होंगे ।
सत्यमेव जयते जनसंपर्क एजेन्सी, औद्योगिक एवं व्यापरिक इकाइयों को विभिन्‍न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करता है तथ अव्यापार की वृद्धि हेतु उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है । क्रेताओं एवं विक्रेताओं को उत्पादों के स्त्रोत, संपर्क एवं समन्वय में यह इजेंसी आपको भरपूर मदद करेगी । इसके माध्यम से आप संपूर्ण देश में व्यापार संवर्धन का अभियान एवं नेटवर्क का निर्माण सुनिश्‍चित कर सकते हैं ।
मीडिया के समन्वय, व्यापार से संबंधित सेमिनारों/संगोष्ठियों/कार्यशालाओं के आयोजन में इस एजेन्सी के सहयोग से आप निश्‍चित रूप से उत्साहित एवं सशक्‍त होंगे ।
आपकी संस्था/कंपनी को व्यापार एवं उद्योग जगत के साथ-साथ भारतीय बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप लाना हमारा कर्तव्य है । हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्‍वास है कि आपकी आवश्यकता और हमारा सहयोग एक अलग आयाम प्रस्तुत करेगी ।
आप अपनी आवश्यकताओं के हमें अवश्य बताएं । हमें विश्‍वास है कि आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप हम उसके अबिलंब निदान हेतु सक्षम होंगे । हमारे सलाह एवं समन्वय से आपको निश्‍चित रूप से शक्‍ति मिलेगी । आपके सकारात्मक पहल एवं पत्रोत्तर की अपेक्षा रहेगी ।
हार्दिक मंगलकामनाओं के साथ,

सत्यमेव जयते जनसंपर्क एजेन्सी
४/१९ए साकेत ब्लॉक, मण्डावली दिल्ली - ११००९२
मोबाइल - 09289723145
ईमेल - satyamevjayate1957@gmail.com
gopal.eshakti@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog

वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सांसद मधुकोड़ा का मामला भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया है । जिसमें ४ हजार करोड़ के घपले का पता चला है । कोड़ा का नाम भी उन राजनेताओं में जुड़ गया है जो भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाये गए हैं या घिरे हुए हैं । भ्रष्टाचार को फैलाने वाले राक्षस सत्ता में आसीन राजनीति के शीर्ष नेता हैं इसकी शुरूआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही हो गई थी । १९५६ में खाद्यान्‍न मंत्रालय में करोड़ों रूपये की गड़बड़ी पकड़ी गई । जिसे सिराजुद्दीन काँड के नाम से जाना जाता है । उस समय केशवदेव मालवीय खाद्यान्‍न मंत्री थे उन्हें दोषी पाया गया । १९५८ में भारतीय जीवन बीमा में मुंधरा काँड हुआ जिसकी फिरोज गाँधी ने पोल खोली थी । १९६४ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए “संथानम कमिटी” का गठन किया गया ।…

काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा - भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में काला धन । यह काला धन बहुत से देशों को, बहुत सी सरकारों को बहुत रुलाता है और बुद्धिजीवी वर्ग को अत्यंत चिंतित करता है । अर्थशास्त्रियों की नाक में दम करके रखता है । रोज न‌ए-न‌ए सुझाव दि‌ए जाते हैं, विचार कि‌ए जाते हैं कि किस तरह इस काले धन पर रोक लगा‌ई जा‌ए. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तो छापों में विश्वास रखता है, जहाँ कहीं सुंघनी मिली नहीं कि पहुँच ग‌ए दस्ता लेकर । अजी! काले धन की बात तो छोड़ि‌ए! नोटों को लेकर इससे भी बड़ी समस्या का सामना क‌ई देशों को करना पड़ता है, और वो है नकली नोटों की समस्या । दूसरे देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करना हो या बेहाल करना हो, प्रिंटिंग प्रेस में दूसरे देश के नोट हूबहू छापि‌ए और पार्सल कर दीजि‌ए उस देश में, बस फ़िर क्या है - बिना पैसों के तमाशा देखि‌ए उस देश का । अब तो उस देश की पुलिस भी परेशान, गुप्तचर संस्था‌एं भी परेशान और सरकार भी परेशान! नकली नोट कहां-कहाँ से ढ़ूंढ़े और किस जतन से? बड़ी मुश्किल में सरकार ।
बचपन से छलाँग लगाकर जब हमने भी होश सँभाला तो आ‌ए दिन काले धन …