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आतंकवाद के खात्में के लिए महारूद्राभिशेक

विश्‍व की सबसे बड़ी समस्या बनते जा रहे आतंकवाद से निपटने के लिए अब धार्मिक क्षेत्रों से भी पहल होने लगी है । पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में उज्जैन के विश्‍व प्रसिद्ध महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्य पुजारी रमण गुरू ने यही अनूठा प्रयोग किया । बिड़ला मंदिर में आयोजित इस रूद्राभिशेक कार्यक्रम में धर्म, अध्यात्म के जरिये आतंकवाद की समूल नष्ट करने के लिए भव्य आयोजन हुआ । जिसमें देश भर से आये ४०० लोगों ने एक स्वर से धर्म के मूल तत्वों को अपनाने, मानवता को मजबूत करने के लिए महारूद्राभिशेक में शिरकत की । इस अनूठे आयोजन में प्रथमतः महालेश्‍वर मंदिर के मुख्य पुजारी रमण गुरू ने देश भर में आतंक के खात्में के लिए आये ४०० लोगों के बीच शिवालिंग-रूद्राभिशेक किया । तत्पश्‍चात्‌ लोगों को शपथ दिलायी कि - “हम देशहित, समाजहित में आतंकी खात्मे के लिए प्राणपण से जुटेंगे ” । मुख्य पुजारी रमण गुरू ने तत्पश्‍चात लोगों के महाकालेश्‍वर के उद्‌घोष “जय महाकाल” के जरिये आत्म विभोर कर दिया । समाज हित के लिए दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी एवं सरहदी गांधी की तर्ज पर इस आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए जन सहयोग की अपील की । उपस्थित भक्‍तों, बुद्धिजीवियों एवं राजनीतिज्ञों ने आतंकवाद के खात्मे के लिए मुख्य पुजारी रमण गुरू को शपथ दिलाकर धार्मिक मूल्यों को बढ़ाने की सहमति जतायी । इस अनूठे कार्यक्रमों को सम्पन्‍न कराने में क्षेत्रीय एस०डी०एम० भूपिन्दर सिंह, ज्योतिषाचार्य शिवहर्ष मिश्र एवं डॉ० जयशंकर पाण्डेय का सराहनीय योगदान रहा ।

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वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
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एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…