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भारतीय राष्ट्रवादी समानता पार्टी के उद्देश्य

* राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को बनाए रखना । * अच्छे कानून एवं अच्छे लोगों के माध्यम से अच्छी सरकार लाना । * भ्रष्टाचार को पैदा करने वाले कारणों को मिटाकर भ्रष्टाचार समाप्त करना । * मानवीय एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को सुधारना । * सभी नागरिकों को बेसिक शिक्षा, जीवनयापन, एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना । * समाज में विभाजन को रोकने के लिए जाति आधारित आरक्षण को समाप्त करने के लिए संकल्पित होना * समाज के योग्य वर्ग के सुधार के लिए आर्थिक आधार पर “सकारात्मक एक्शन” प्रणाली स्थापित करना । * सभी नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समान अवसर स्थापित करना । * अवसरवादियों द्वारा अपने निहित स्वार्थ के लिए सांत्वना की नीति को खत्म करने के लिए दृढ़ रहना । * राष्ट्र की अनन्त समस्याओं के अन्त के लिए प्रभावी राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति को अपनाने के लिए कार्य करना । * अवैध घुसपैठिए जो हमारे नागरिकों की जीविका छीन रहे हैं तथा देश के लिए खतरा बने हुए हैं, को वापस भेजना । * भारत को सार्वभौमिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना । * आतंकवाद एवं सीमा पार घुसपैठ से निपटने के लिए एक प्रभावी एवं व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति लाना । * साक्ष्य सुरक्षा योजना एवं त्वरित न्याय पर जोर देकर आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के लिए कार्य करना । * राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करना एवं चुनावी सुधार लाना । * समान सिविल संहिता जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद ४४ में वर्णित है को सुनिश्‍चित करना । * चरित्र निर्माण को समाहित करते हुए प्रभावी शिक्षा नीति द्वारा युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना एवं भारत को वैश्‍विक नेता बनाने के लिए उनकी शक्‍ति का उपयोग करना । * कृषि जिस पर भारत की अधिकतम जनसंख्या आश्रित है, को लाभ का व्यापार बनाने के लिए हमारे किसानों को सम्पन्‍न बनाने के लिए एक नई कृषि नीति को लाने के लिए कार्य करना । * नियत-समय आधार पर आधारित संरचना बनाना एवं सामूहिक रोजगार अवसर सृजित करना एवं जीवन की गुणवता सुधारना । * किसी क्षेत्र विशेष में आधारिक संरचना के अत्यधिक भार को कम करने के लिए देश के सभी के सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्‍चित करना । * व्यापक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लाना ।* समान अवसर देकर स्त्रियों का सशक्‍तिकरण । * पर्यावरण सुरक्षा । * ऊर्जा स्व-निर्भरता । * देश के प्रशासन में सकारात्मक परिवर्त्तन लाने के लिए सभी अन्य प्रासंगिक एवं परिणामिक कार्य करना ।

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वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
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एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…