Skip to main content

हिंदू धर्म को अपमानित करने की कोशिश

अब विदेश ही नहीं देश में भी हिंदू धर्म को अपमानित करने का फैशन चल पड़ा है । प्रसिद्ध चित्रकार एमएफहुसैन ने अपनी पेंटिग्स के माध्यम से हिंदू देवी-देवताओं का सरेआम अपमान किया था जिसकी काफी आलोचना हुई थी । अब खबर है कि अमेरिका की एक बियर कंपनी ने अपने ब्रांड की बोतल पर भगवान गणेश का फोटो छापा है । देश भर के कई संगठनों ने इसकी निंदा की है । विदेश में भी बियर कंपनी को आलोचना के बाद इस लेवल को हटाना पड़ा । बियर बनाने वाली अमेरिका की कैलिऒर्निया स्थित कंपनी लॉस्ट कॉस्ट ब्रूअरी ने इंडिया पेल एले ब्रैंड के लेबल पर गणेशजी का फोटो छापा है, जिसमें गणेश को चार में से एक हाथ और सूंड मे बियर थामे हुए हैं । अमेरिका के रहनेवाले ब्रज धीर ने कंपनी पर दावा ठोक कर एक अरब डॉलर का हर्जाना माँगा है । धीर अमेरिका की गोल्डन गेट विश्‍वविद्यालय में लॉ के विद्यार्थी हैं जो मुंबई में भी वकील के तौर पर पंजीकृत हैं । धीर के अलावा सेफवे सुपरमार्केट चेन ने भी इसे हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाला कहा है । धीर ने इसे नफरत फैलाने वाला अपराध कहा है । भारत में विश्‍व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता प्रवीण तोगाड़िया का कहना है कि अमेरिकी कंपनी ने ऐसा जानबूझकर किया है । हम पीएचपी की अमेरिकी इकाई द्वारा कंपनी के खिलाफ कानूनी कारवाई कराऐंगे और कंपनी प्रॉडक्ट का बॉयकॉट करने के लिए अभियान चलाएगे । परिषद के विदेश मामलों से जुड़े गौतम चटर्जी ने कहा दुनियाँ भर में हिंदुओं को अपमानित करने की कोशिशें हो रही हैं । अब चर्चा देश में धार्मिक भावना पर हो रहे कुठाराघात की करें- “एनसीईआरटी द्वारा पाठ्‌य पुस्तकों में महाराणा प्रताप तथा छात्रपति शिवाजी की उपेक्षा करने और मुगलों को महिमामंडित करने के विरोध में हिंदू जनजागृति समिति का कहना है कि एनसीईआरटी का पाठ्‌यक्रम हमेशा से विवादों में रहा है । समिति द्वारा गुड़गाँव के उपायुक्‍त को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सातवीं कक्षा की पुस्तक हमारे अतीत भाग-२ में महाराणा प्रताप के नाम तक का उल्लेख नहीं किया है, जबकि मुगलों के इतिहास को विशेष महत्व देते हुए ५०-६० पृष्ठों में छापा गया है । इतना ही नहीं इसमें मुगल शासक बाबर, अकबर के चित्र हैं परन्तु महाराणा प्रताप का एक भी चित्र नहीं है । कक्षा छह में हनुमान और जामवंत के युद्ध को दिखाया गया है । इस चित्र में हनुमानजी को जूता पहने दिखाया गया है । खेद की बात तो यह है कि पुस्तक में कहीं भी नहीं बताया गया है कि यह भगवान का अपमान है । कक्षा-१० की इतिहास की पुस्तक भारत और समकालीन विश्‍व भाग दो में बताया गया है कि उत्पादों की बिक्री के लिए उत्पादों के चित्र भी दिए हैं, जिसमें भगवान विष्णु सनलाइट नामक साबुन के विज्ञापन में है जबकि भगवान श्रीकृष्ण का प्रयोग बच्चों के उत्पाद हेतु किया गया है । केन्द्रीय विद्यालयों का यह पाठ्‌यक्रम उत्तर भारत के विद्यालयों में भी पठाया जा रहा है, जिसके कारण लाखों किशोर विद्यार्थियों के कोमल मन पर विकृत इतिहास सुविचारित और नियोजित ढ़ंग से अंकित किया जा रहा है । समिति की ओर से इस मुद्‌दे पर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और आंघ्रप्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर इस पाठ्‌यक्रम को हटाने की माँग भी की जा चुकी है । ज्ञापन में माँग की गई है कि वे इस पाठ्‌यक्रम को उच्चस्तरीय जाँच करवा कर ऐसे विषयों को पाठ्‌यक्रम से हटाया जाए ।
- गोपाल प्रसाद

Comments

Popular posts from this blog

वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य

शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

राजनीति में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह सांसद मधुकोड़ा का मामला भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया है । जिसमें ४ हजार करोड़ के घपले का पता चला है । कोड़ा का नाम भी उन राजनेताओं में जुड़ गया है जो भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाये गए हैं या घिरे हुए हैं । भ्रष्टाचार को फैलाने वाले राक्षस सत्ता में आसीन राजनीति के शीर्ष नेता हैं इसकी शुरूआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही हो गई थी । १९५६ में खाद्यान्‍न मंत्रालय में करोड़ों रूपये की गड़बड़ी पकड़ी गई । जिसे सिराजुद्दीन काँड के नाम से जाना जाता है । उस समय केशवदेव मालवीय खाद्यान्‍न मंत्री थे उन्हें दोषी पाया गया । १९५८ में भारतीय जीवन बीमा में मुंधरा काँड हुआ जिसकी फिरोज गाँधी ने पोल खोली थी । १९६४ में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए “संथानम कमिटी” का गठन किया गया ।…

एक आरटीआई एक्टिविस्ट के संघर्ष की कहानी, उसी की जुबानी

पिताजी गुरु भी थे। गरीबी, प्राइवेट ट्यूशन वगैरह करके आजीविका चलाते; परिवार चलाने के साथ-साथ सारे समाज, देश की चिंता उनका प्रमुख स्वभाव रहा। हमेशा दूसरों से कुछ अलग करने की चाह; सीमित संसाधनों में भी देश, समाज और मित्रों के लिए समय निकालना; शायद उनका यही स्वभाव मेरे मस्तिष्क में रच-बस गया, कार्यशैली का हिस्सा बन गया। छात्र जीवन बहुत फाकाकशी, गरीबी का रहा, लेकिन मेरे पिताजी ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। हमारे मकान का धरन (कड़ी) लकड़ी का था, जो टूट गया था। उसी पर पूरे छत का लोड था। मकान कब गिर जाय, कुछ ठिकाना नहीं।प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते थे। कभी घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। ऐसी ही परिस्थितियों में एक बार गुल्लक तोड़ा, तो पाँच रुपए निकले। उन्हीं से दो किलो चूड़ा लाया था। उसी को भिंगोकर, नमक-मिर्च लगाकर सपरिवार ग्रहण किया। अपनी शादी बिना तिलक-दहेज के की। दो बहनों की शादी आज से बीस साल पहले दिल्ली में मात्र सत्रह हजार की मामूली रकम में ही की। दोनों बहनों की शादी एक ही तिथि में किया। हमारे समाज (अखिल भारतीय खटिक समाज) के जो राष्ट्रीय पदाधिकारी थे, उन्होंने अपना मकान पंद्…