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प्रगति मैदान में आयोजित पुस्तक एवं स्टेशनरी मेला में दिखा विकास और बदलाव

भारतीय प्रकाशन उद्योग स्वतंत्रता के बाद अपने ६२ वर्षों के चौतरफा विकास, भाषायी समृद्धि से परिपूर्ण होकर विकास की उच्चतम श्रेणी में स्थापित हो चुका है । विश्‍व के सात सर्वोच्च प्रकाशक देशों में से एक भारतीय प्रकाशन जगत की गौरव यात्रा की कड़ी में भारतीय भाषाओं में अंग्रेजी सहित प्रतिवर्ष ९० हजार से अधिक पुस्तकें प्रकाशित होती हैं । इस बार २७० प्रकाशकों ने इसमें भाग लिया तथा स्टॉलों की संख्या ६०० थी । भारतीय प्रकाशक उद्योग व्यवसाय के संवर्धन की श्रृंखला में १५ वां दिल्ली पुस्तक मेले का आयोजन फेडेरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एवं ओडिया ट्रेड प्रमोशन आर्गेनाईजेशन के तत्वाधान में २९ अगस्त से ६ सितम्बर को प्रगति मैदान, नई दिल्ली में किया गया दिल्ली पुस्तक मेला का उद्‌घाटन केन्द्रिय राज्यमंत्री श्री सलमान खुर्शीद, स्वतंत्र प्रभार, कोपोरेट अफेयर्स एवं माइनोरिटी अफेयर्स मंत्रालय, भारत सरकार किया गया । ‘किताबें समाज की कुंजी’प्रगति मैदान में १५वें दिल्ली पुस्तक मेले का उद्‌घाटन करते हुए कॉरपोरेट तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री सलमान खुर्शीस ने कहा कि पुस्तकों से ही समाज को परखने की समझ मिलती है । किताबों में ही समाज को जानने की कुंजी होती है, जिसे खोलने के बाद समाज को समझने का अवसर मिलता है । पुस्तक मेलों की सार्थकता की चर्चा के बीच खुर्शीद ने कहा कि इस तरह के पुस्तक मेले बुद्धिजीवियों का संगम होते हैं और शिक्षा तथा बौद्धिक स्तर पर बहस का मंच बनते हैं । पुस्तक मेलों का आयोजन समाज के बौद्धिक विकास के लिए जरूरी है । उन्होंने किताबों को बच्चों का नजरिया, उनकी सोच की दिशा और जानकारियां बढ़ाने वाला अच्छा साथी बताया । खुर्शीद ने पूर्वोत्तर के साहित्य पर केन्द्रित मेले को देश के जनजाति बहुल व सुदूरवर्त्ती इलाकों को समझने के लिए सराहनीय कदम बताया । इसी मौके पर संस्कृति विभाग के सचिव जवाहर सरकार ने आयोजन के उद्देश्य को पूर्वोत्तर से जोड़ते हुए कहा कि मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, असम आदि राज्यों के साहित्य-संस्कृति को जानने का अवसर पुस्तक मेला है । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण के लिए जरूरी है कि हम सभी राज्यों के बारे में भी जानें । आईटीपीओ के प्रबंधक डॉ. सुबास पाणी ने कहा कि पुस्तक मेले समाज का मार्ग प्रशस्त ही नहीं करते बल्कि ज्ञानवर्द्धन भी करते हैं । फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स के अध्यक्ष आरसे गोविल ने दिल्ली में आयोजित पुस्तक मेले को अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया । इसी अवसर पर अआईटीपीओ के महाप्रबंधक राजीव यादव ने मेले को एक बड़े फलक वाला आयोजन व एक ही स्थान पर सभी पुस्तकें उपलब्ध होने का अवसर कहा । खेल कमेंटेटर डॉ. नरोत्तमपुरी ने प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक राष्ट्रमंडल खेल ; सफरनामा मैत्री खेलों का लोकार्पंण किया । गोयल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स और डायमन्ड पाकेट बुक्स की पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम भी आयोजित किये गए । भारतीय प्रकाशकों के अलावे इस वर्ष मेले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की भी भागीदारी रही, जिनमें से कुछ निम्नलिखित है :* अबुधाबी अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला प्राधिकरण, फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला प्राधिकरण, चीन के प्रकाशक, अमेरिकी दूतावास, पाकिस्तान के प्रकाशक । फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स ने भारतीय भाषाओं के प्रकाशकों को स्टॉल के किराए में ५० प्रतिशत तक छूट देने की भी घोषणा की है । इनमें हिंदी भाषा के प्रकाशक भी शामिल हैं । नेशनल बुक ट्रस्ट की तरह से आरंभिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है । फेडरेशन के निदेशक शक्‍ति मालिक ने बताया कि भाषायी सर्वेक्षण एवं विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में छपे प्रकाशित पुस्तकों को सारणीबद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य कोलकाता नेशनल लाइब्रेरी का है जहाँ वर्षों से किताबों के बंडल ही नहीं खुलते हैं । एनसीआरटी के पाठ्‌यक्रम की अनिवार्यता एवं दसवीं परीक्षा वैकल्पिक हो जाने का सबसे ज्यादा असर प्रकाशकों पर पड़ा है । इससे कुंजी, गाईड छापने वाले प्रकाशकों को काफी नुकसान होगा । पुस्तकों की मूल्यवृद्धि के लिए सरकार जिम्मेवार क्योंकि कागज के मूल्य पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है । उन्होंने यह भी कहा क्योंकि कागज के मूल्य पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है । उन्होंने यह भी कहा कि जसवंत की किताब को बिना पढ़े ही पाबंदी का फरमान जारी कर दिया जाता है जो अनुचित है । इंटरनेट व टीवी का पढ़ने की मनोवृत्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है बल्कि इससे पुस्तकों का मह्त्व और अधिक बढ़ा है । टाईम्स ऑफ इंडिया का प्रकाशन विभाग “टाईम्स ग्रुप बुक्स” (टीजीबी) इस अवसर का उपयोग अपने अपाठकों व ग्राहकों में निकटता स्थापित करने में किया । विभाग ने अपनी नूतन विपणन रणनीतियों एवं लोकव्यापी विषयवस्तु के माध्यम से अल्पकाल में ही ख्याति अर्जित किया । भारतीय प्रकाशन की विशेष प्रतिभा, ‘युनेस्को’ अवार्ड से सम्मानित प्रथम भारतीय प्रकाशक एवं पद्‌मश्री सम्मान से विभूषित और जाने माने पर्काशक दीनानाथ मल्होत्रा ने बताया कि आज भारत दुनिया में तीसरा बड़ा अंग्रेजी भाषा का न केवल प्रकाशन उद्योग चला रहा है, वहीं प्रतिष्ठित फैंकफर्ट जैसे पुस्तक मेले में अतिथि देश बनकर और लंदन बुक फेयर में विदेश फोक्स दर्जा हासिल कर भविष्य में अपनी अत्यधिक सशक्‍त उपस्थिति दर्ज कर रहा है । किसी भी देश के इतिहास, कला-संस्कृति मूल्यों, तकनीकी, विज्ञान, विकास और जीवन के अनेक पहुलुओं के महत्व की स्थापना और देशकाल की खोज में पुस्तके अपनी मार्ग- दर्शक की भूमिका निभाती है । फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स’ के निदेशक एवं कोषाध्यक्ष शक्‍ति मलिक ने बताया कि इस बार मेले का थाम नाथ- ईस्ट’ रखा गया जिसके अन्तर्गत भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के प्रकाशकों, लेखकों और साहित्य प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया । उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रकाशकों को आ रही उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि आगामी ‘ट्‌यूरिन बुक फेयर- २०१०’ इटली के सुप्रसिद्ध मेले में भारत को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आमन्त्रित किया गया । मास्को पुस्तक मेले में भारत होगा अतिथि देशरूस के मास्को शहर में आगामी २ सितंबर से ७ सितंबर तक आयोजित किए जा रहे ‘मास्को अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले’ में इस बार भारत अतिथि देश होगा । नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के मुताबिक २००७ से २००९ के बीच २१ भारतीय भाषाओं के लगभग १०० प्रकाशकों की १००० से ज्यादा पुस्तकों का प्रदर्शन किया जाएगा । मेले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर और उनके द्वारा लिखी गई १०० पुस्तकों सहित ट्रस्ट की १० बाल पुस्तकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा । फेडरेशन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के विशिष्ट सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष आनन्द भूषण ने पुस्तक मेले की गरिमा और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिल्ली पुस्तक मेला अपनी भागीदारी- गुणवत्ता, आकर्षक स्टॉल एवं पेवेलियन साज- सज्जा में अन्तरार्ष्ट्रीय प्रदर्शनी मापदंडों पर खरा उतरता है । जिसकी विश्‍व स्तरीय व्यावसायिक संवर्धन संस्थानों ने प्रशंसा की है । बताया गया कि फेडरेशन की सभी प्रकाशित सामग्रीयाँ जल्द ही ऑनलाईन उपलब्ध होगी । अधिकता प्रकाशकों द्वारा १० प्रतिशत की छूट दी गई । यह मेला युवाओं के लिए मुख्य आकर्षण था । इंडिया ट्रेड प्रमोशन आर्गेनाईजेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंधन निदेशक सुबास पाणी ने कहा कि दिल्ली पुस्तक मेला प्रकाशन- व्यवसाय की उपलब्धियों, व्यापारिक गतिविधियों के आदान-प्रदान करने के साथ सहायक प्रकाशन अनुबन्ध, अनुवाद, कॉपी राईट, पुर्नप्रकाशन- व्यवस्था, व्यावसायिक सारव वृद्धि के अवसर प्रदान करता है । यह पुस्तक मेला प्रकाशन व मुद्रण के नये दौरे में कम्यूटरीकरण, इमेल, एस.एम.एस आदि आधुनिक तकनीकों के व्यावसायिक समन्वय की उपयोगिता को अपनाने की प्रेरणा देता है । भारतीत प्रकाशक विभिन्‍न भाषाओं के प्रकाशन में प्रतिवर्ष में १,००,००० करोड़ का व्यवसाय करते हैं । फेडरेशन के अध्यक्ष श्री आर. सी. गोविल ने बताया कि ‘जसवन्त सिंह द्वारा लिखित बहुचर्चित पुस्तक ‘जिन्‍ना इंडिया - बंटवारा और आजादी’ पर एक पैनल विचार-विमर्श आ आयोजन २९ अगस्त को जिसमें केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल टी. एन. चतुर्वेदी, दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज सी एम नायर और महात्मा गाँधी फाउंडेशन के मुखिया तुषार गाँधी ने भाग लिया । १५ वा दिल्ली पुस्तक मेला राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित मेला प्रदर्शन स्थल प्रगति मैदान, नई दिल्ली, में २९ अगस्त से लेकर ६ सितम्बर २००९ तक प्रातः १० बजे सायं ८ बजे तक आम जनता के लिए खुला था । पुस्तक मेले में देश-विदेश के प्रकाशन संस्थान पुस्तक विक्रेता, विरतक, पत्रिका एवं सामयिक प्रकाशक, निर्माता, डीलर तकनीकी, शिक्षण वस्तुओं के अतिरिक्‍त कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनियों ने भाग लिया । जैसा कि सर्वविदित है कि प्रतिवर्ष दिल्ली पुस्तक मेले में राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशक, लाइब्रेरियों के सम्बन्धित अधिकारी, अनुसंधान व शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, जाने-माने लेखक कार्यों में जुड़ी प्रतिभाएं इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली पुस्तक मेला राजधानी दिल्ली व निकटवर्त्ती राज्यों के लोगों हेतु आकर्षण का प्रतीक बनता जा रहा है । दिल्ली पुस्तक मेले के दौरान पुस्तक प्रकाशन व्यवसाय संवर्धन के विभिन्‍न विषयों पर विशेष कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, सेमिनारों, व्यावसायिक-वार्ताओं शिक्षण कार्यक्रमों, पुस्तक विमोचन, नई पुस्तकों के लोकापर्ण के अतिरिक्‍त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । प्रकाशकों और वितरकों के टकराव का असर मेले पर पंद्रहवें दिल्ली पुस्तक मेले पर प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के आपसी टकराव का असर इस बार साफ दिखाई दिया । २९ अगस्त से प्रगति मैदान मेले में भाग लेने वाले प्रकाशंकों और पुस्तक विक्रेताओं की संख्या में गत वर्ष विक्रेताओं की संख्या में गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष २५ फीसदी तक की कमी आई । देश भर में हर साल २४ भाषाओं में लगभ्ग ९० हजार पुस्तकें प्रकाशित होती हैं । इसमें उत्तर भारत का बहुत बड़ा हिस्सा है । इतने बड़े पुस्तक प्रकाशक और बिक्री से संबंधित कारोबारी साम्राज्य पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने को लेकर प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के दो बड़े संगठनों का आपसी टकराव था । मेले का आयोजन इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन और दि फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा पिछले १५ वर्षों से संयुक्‍त रूप से किया जा रहा है । प्रकाशकों और विक्रेताओं का दूसरा सशक्‍त दि फेडरेशन ऑफ पब्लिशर्स एंड बुक सेलर्स एसोसिएशन इन इंडिया (एफपीबीए) इसमें भागीदारी नहीं कर रहा । फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफ‍आईपी) के अध्यक्ष रमेश सी, गोविल भी स्वीकार करते हैं कि प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के हितों के आपसी टकराव के कारण कुछ प्रकाशक और विक्रेता अलग हो गए थे । एफ‍आईपी और एफपीबीए में पदाधिकारी और एस चांद एंड कंपनी के उपाध्यक्ष (प्रकाशन) नवीन जोशी ने बताया कि देशभर में एफ‍आईपी के सदस्यों की संख्या लगभग ५० है और एफपीबीए के सदस्यों की संक्या २०० से ज्यादा । उन्होंने स्वीकारा, मेले के आयोजन में फेडरेशन ऑफ पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स एसोसिएशन इन इंडिया का नाम नहीं था । स्टेशनरी मेला में विकास और बदलाव की झलककार्यालय और स्कूल स्टेशनरी में क्या-क्या बदलाव आए हैं? इसकी जानकारी हेतु राजधानी के प्रगति मैदान में ग्यारहवें ‘स्टेशनरी फेयर- २००९’ का आयोजन किया गया । मेले में स्टेशनरी निर्माण के क्षेत्र की जानी-मानी कंपनियों से लेकर इस क्षेत्र में नया कदम रखने वाली कंपनियों ने भी भाग लिया । तकनीकी विकास के साथ स्टेशनरी निर्माण के क्षेत्र में बहुत से बदलाव आए हैं । नए-नए उपकरणों के निर्माण ने कार्यालय और पढ़ाई संबंधी कामकाज बहुत आसान कर दिया है । वरिष्ठ महाप्रबंधक सफदर एच. खान का कहना है कि पुस्तक प्रकाशन और स्टेशनरी निर्माण और बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए आईटीपीओ द्वारा इस साल इस मेले का आयोजन किया गया । यहां एक ही छत के नीचे विक्रेता और क्रेताओं के साथ निर्माता और वितरकों का आपसी संपर्क आसान हो जाता है । साथ ही लोगों को पूरे साल दौरान इस क्षेत्र ने क्या उपलब्धियां हासिल की इसकी जानकारी भी मिलती है । हॉल संख्या १२-ए में ६ सितंबर तक चलने वाले इस मेले में फाइल, बैग, नोट बुक, कागज उत्पाद, रबर स्टाम्प, मशीन और माल, लेजर मशीन, की-चेन, मेडल, कार्बन पेपर, करेक्शन फ्लूड, पेपर कटर्स, सीलिंग वैक्स, प्रिंटर कार्टरेज, आर्ट मेटिरियल और रंग, फोल्डर्स, स्कूल स्टेशनरी और कम्प्यूटर स्टेशनरी और कम्प्यूटर स्टेशनरी, लिफाफे, डायरी, पेंसिल, शार्पनर, इरेजर, स्केल, कटर, ग्लू स्टिक, हैंडमेड कागज, बाल पेन, जैल पेन, फाउंटेन पेन, स्टेपलर्स और पिन आदि के अलावा भी आज कार्यालय और स्कूल स्टेशनरे में बहुत-सी वस्तुएं आती हैं । इन सबके निर्माताओं ने यहां अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया । इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑगनाइजेशन (आईटीपीओ) द्वारा आयोजित इस स्टेशनरी मेले का आयोजन दिल्ली पुस्तक मेला के साथ किया गया । भारत स्टेशनरी का बहुत बड़ा बाजार है । बात पढ़ाई से संबंधित स्टेशनरी की ही की जाए तो देश में १०० केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, २२००० कॉलेज, २ लाख १६ हजार ८२० स्कूल, २ लाख ९८ हजार ९४ हाई स्कूल और ८ लाख ४१ हजार ६९५ मिडल स्कूल हैं । इनमें भारी मात्रा में स्टेशनरी का उपयोग होता है । इससे भी कहीं ज्यादा स्टेशनरी की खपत औद्योगिक व व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ ही सरकारी, अर्धसरकारी और निजी संस्थानों में होती है । स्टेशनरी फेयर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लोगों के लिए नई-नई तकनीकों से रूबरू होने की अच्छा मौका मिला ।

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