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क्या है श्‍वेत क्रांति ?

भारत दुनिता का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है । देश की जीडीपी में डेयरी उद्योग की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और आर्थिक परिदृश्य में इसकी दमदार उपस्थिति भी । देश के अन्य उद्योगों की तरह डेयरी उद्योग की भी अपनी खामियां हैं । इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस उद्योग की संरचना बहुत संगठित नहीं है । देश में काम कर रहे तकरीबन सभी को-ऑपरेटिव फेडरेशन स्मॉल एवं मीडियम सेक्टर से ताल्लुक रखते हैं ।
एसएमई की आपूर्ति श्रृंखला में कई कमियां हैं । मध्यस्थों की बढ़ती दखलंदाजी और विभिन्‍न आपूर्ति श्रृंखला के बीच तालमेल के अभाव की वजह से काफी मुश्किलें आती हैं । इससे दूध की गुणवत्ता और आपूर्त्ति श्रृंखला की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है । इस श्रृंखला में कई कमजोर कड़ियां होती हैं, इसके अलावा अनावश्यक मानवीय दखल होता है जिससे गलतियों की संभावना बढ़ती है और खर्च बढ़ता है । देश में डेयरी को-ऑपरेटिव्स खासकर एसएमई खिलाड़ियों को मुनाफा बढ़ाने के लिए इन समस्याओं को सुलझाना जरूरी है ।
इस क्षेत्र से जुड़े एसएमई के लिए समन्वय की कमी सबसे गंभीर समस्या है, खासकर उन मामलों में जहां मांग से जुड़ी भविष्यवाणी करने की जरूरत हो । मांग से जुड़ी भविषयवाणी के मामले में अकुशलता की वजह से ग्राहकों की मांग की तुलना में आपूर्ति कई बार अधिक हो जाती है जिससे दूध के खराब होने का खतरा उत्पन्‍न हो जाता है । इससे दूध को संभालकर रखने में समस्या का सामना करना पड़ता है । ए‍आरजी फूड्‌स के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव वर्मा कहते हैं, ‘सटीक भविषयवाणी नहीं हो पाने की वजह से भारतीय डेयरी उद्योग में मांग-आपूर्ति का गंभीर संकट उत्पन्‍न हो जाता है कई बार आपूर्ति मांग की तुलना में अधिक हो जाती है जिससे दूध बर्बाद हो जाता है । ’
भारतीय डेयरी उद्योग में सप्लाई चेन में तत्परता की कमी है । यह एसएमई और बड़े खिलाड़ी दोनों क्षेत्रों में पाया जाता है । इससे लंबी अवधि तक कारोबार करने के उद्देश्य प्रभावित होते हैं । डेयरी उद्योग को ऐसे आईटी सॉल्यूशंस की सख्त जरूरत है जिससे दूध संग्रह के बारे में तुरंत अपडेट हासिल किया जा सके और रीयल टाइम बेसिस पर आंकड़े जमा किए जा सकें । आईआईटी खड़गपुर में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के प्रोफेसर एच दास कहते हैं, ‘भारतीय डेयरी बाजार का स्ट्रक्चर बहुस्तरीय है और पिरामिड की तरह के संगठन हैं । अगर आधार के हिसाब से बात करें तो यह बड़े पैमाने पर असंगठित है । इसमें छोटी डेयरी, ग्रामीण दूध उत्पादन, मिल्कमैन (दूधिए) और वेंडर्स शामिल हैं । आधुनिक तकनीक के इस जमाने में एक आईटी आधारित सॉल्यूशंस इस क्षेत्र में काम करने वाले एसएमई के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है ।
इन हालात में इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज (आईसीटी) डेयरी उद्योग में कार्यरत एसएमई एवं बड़े को-ऑपरेटिव के लिए भी कारगर साबित हो सकता है । आईसीटी में रीयल टाइम बेसिस पर डाटा एनालिसिस और डाटा ट्रांसफर के लिए तकनीक उपलब्ध हो सकती है । घरेलू डेयरी उद्योग में काम करने वाली एसएमई के लिए आईसीटी से कैश पेमेंट ऑटोमेशन, ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सेंट्रलाइज्ड सिस्टम मॉनिटरिंग और विभिन्‍न सप्लाई चेन के बीच रीयल टाइम नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं हासिल हो सकती हैं ।
सहकारी दूध संग्रह समितियों तक पहुंचने वाला दूध किसानों के जरिए पहुंचता है जिसकी गुणवत्ता भी अलग-अलग होती है । अपनी अलग पहचान कायम रखने के लिए किसानों को इलेक्ट्रॉनिक कोड से युक्‍त प्लास्टिक कार्ड उपलब्ध कराया जा सकता है । इन्हें एक बॉक्स में जमा किया जा सकता है जो पहचान संख्या को पढ़कर सूचनाएं जमा कर लेता है । इसके बाद यह सूचना कंप्यूटर तक पहुंच जाती है । जब इलेक्ट्रॉनिक स्केल पर रखे एक बर्तन में दूध डाला जाता है तो इसकी मात्रा नापकर मशीन इस सूचना को भी कंप्यूटर तक पहुंचा देती है । इसके बाद एक ट्यूब से डेयरी तक पहुंच रहा दूध बीच में ही एक अलग ट्यूब से सैंपल के रूप में इलेक्ट्रॉनिक मिल्क टेस्टिंग यूनिट तक पहुंच जाता है । दूध में वसा की मात्रा के हिसाब से दूध की गुणवत्ता नापी जाती है और फिर इसका हिसाब कर एक स्लिप के रूप में उसकी कीमत मशीन से बाहर आ जाती है जिसका दूध उत्पादक को भुगतान कर दिया जाता है । इस प्रक्रिया में बिना मानवीय दखल के २० सेकेंड से भी कम का समय लगता है ।

पायल अग्रवाल

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