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बाजारू न बनने पाए हिंदी


परिवहन, जनसंचार, पूंजीवाद और बाजार के विस्तार ने हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय भाषा का स्वरूप प्रदान किया है । यही वह कारण है, जिसके चलते आज बाजार में जिन्दी अनुवादों की बाढ़ आ रही है । मौलिक किताबों से ज्यादा अनुवाद की गई किताबें आ रही हैं और यदि अनुवाद का जोर ऐसा ही रहा तो अनुवाद की यह प्रक्रिया हिन्दी के लिए भाषा बंधन की प्रक्रिया बनने की बजाए, भाषा भक्षण की प्रक्रिया बन जायेगी । हिन्दी के बाजारू हो रहे स्वरूप पर चिंता व्यक्‍त करते हुए ये बातें जाने-माने आलोचक प्रो. नामवर सिंह ने कहीं । जे‍एनयू हिन्दी यूनिट द्वारा भाषा बंधन विषय पर कला और सौंदर्यशास्त्र संस्थान सभागार में आयोजित सेमिनार में शिरकत करने पहुंचे नामवर सिंह ने कहा कि वर्तमान में मीडिया की नजर से हिन्दी अंतरराष्ट्रीय भाषा हो गई है, लेकिन इसके कारणों पर विचार करना होगा । हमें देखना होगा कि हिन्दी के इस नए रूप निर्माण से वह अपनी जड़ों से लोकबोलियों से कितनी जुड़ी रह पाएगी । इस मौके पर कुलपति प्रो. बी.बी. भट्‌टाचार्य ने हिन्दी यूनिट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हिन्दी का भविष्य उज्जवल तभी बनेगा, जब किसी भी विषय की मौलिक अवधारणाओं को हिन्दी में सोचा, समझा और लिखा जाएगा ।
भारत में लुप्त होती बोलियों को बचाने के लिए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई । इसमें देश और दुनिया के बड़े भाषा विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं । संगोष्ठी का आयोजन इंटैक ने किया है । संगोष्ठी के बारे में जानकारी देते हुए संस्था के अध्यक्ष एसके मिश्रा ने बताया कि देश की ९६ प्रतिशत बोलियों को बोलने वाले महज चार प्रतिशत हैं । इससे साबित होता है कि किस तरह बोलियां दिन ब दिन खत्म होती जा रही हैं । यूनेस्को रिपोर्ट के अनुसार भी भारत में १९६ बोलियों का अस्तित्व खतरे में है । इस अवसर पर जे‍एनयू की प्रोफेसर अन्विता अब्बी ने बताया कि बोलियों को बचाने के लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए । अगर बोलियों को बचाना है तो उन्हें स्कूली शिक्षा में शामिल करना होगा, तभी ये बोलियां फल-फूल सकेंगी ।

Comments

  1. hindi ka apmaan desh ka apmaan hai ..


    iske khilaf uthne wale log algavwadi pravitti ke hote hai unhe unke maqsad mein kaamyaab nahi hone denge....

    unki pravitti unki soch unke anuchit karyo par tatkaal rok na lagai hayi to in logo ke karkamlo se doosra pakistaan banne mein der nahi lagegi....



    In logo ko deshdroh ghoshit karna chahiye....

    hindi hamari maatra bhasha hai......

    ReplyDelete

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