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वेश्याओं, निस्सहायों, विधवाओं तथा उनके बच्चों की सेवा में समर्पित संस्था भारतीय पतिता उद्धार सभा

देह व्यापार को वैध घोषित करने की माँग :देश में यौनकर्मियों के हितों की खातिर संघर्ष करनेवाली गैर सरकारी संस्था भारतीय पतिता उद्धार सभा ने माँग की है कि जब दिल्ली उच्च न्यायालय धारा ३७७ के तहत समलैंगिकता को वैध ठहरा सकता है तो देह व्यापार को भी कानूनी मान्यता दी जानी चाहिए । सभा के अध्यक्ष खैराती लाल भोला ने केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली को लिखे पत्र में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब समलैंगिकता को वैध ठहराया जा सकता है तो देश की लाखों यौनकर्मियों की वर्षों से चली आ रही माँग को पूरा करते हुए देह व्यापार को कानूनी रूप से वैध ठहराया जाय । देश में ११०० रेडलाईट क्षेत्र हैं जहाँ लगभग तीन लाख कोठों में २३ लाख यौनकर्मी अपने ५४ लाख बच्चों के साथ रह रही हैं । दुखद बात यह है कि कोठा मालकिन इन यौनकर्मियों की आय का ८० फीसदी खुद ही ले लेती है । अगर इस क्ष्रेत्र को कानूनी मान्यता मिल जाए तो यौनकर्मियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की स्थिति में बहुत सुधार हो सकता है । क्योंकि पुलिस भी यौनकर्मियों से लाखों रूपए की वसूली करते हैं । श्री भोला ने उच्च न्यायालय के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि कुदरत ने स्त्री और पुरूष को एक दूसरे का पूरक बनाकर प्राकृतिक संतुलन बना रखा है । हमारा समाज भी पारिवारिक, धार्मिक और नीति संबंधी मूल्यों पर आधारित है । इसलिए समलैंगिकता संबंधी जटिल मुद्‌दे का समाधान भी समाज के दायरे में होना चाहिए । श्री भोला ने कहा कि अगर सरकार ने समलैंगिकता को मंजूरी दी तो सभा सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी । वोट का अधिकार दिलायाःराजधानी दिल्ली के रेडलाईट एरिया की सेक्स वर्करों को वोट डालने का अधिकार मिल ही गया । ये इस बात से तो खुश हैं कि विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र में उन्हें भी भागादारी का अवसर मिल गया लेकिन इस बात को लेकर ये निराश भी हैं कि वोट देने के बावजूद उनकी नारकीय जिंदगी में शायद ही सुधार हो पाए । जीवी रोड स्थित रेडलाईट एरिया में काम करनेवाली करीब २५०० सेक्स वर्करों में से १२०० के वोटर आई कार्ड बन गए हैं । इस कार्ड को बनाने में उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा और सरकारी दफ्तरों में धक्‍के खाने पड़े । इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी । इस कार्ड को पाने के लिए उन्होंने एक साल पहले कवायद शुरू की थी और इसके लिए भारतीय पतिता उद्धार सभा के चेयरमैन खैरातीलाल भोलाके अलावा इकबाल अहमद और राजेश भारद्वाज ने खासी मशक्‍कत की । लगभग साल भर पहले ही ढाई हजार फॉर्म भरकर भेज दिए गए थे लेकिन जाँच के दौरान पर्याप्त सूबूत ना होने या सेक्स वर्करों के उनके कोठों पर न मिलने के कारण ही करीब १२०० के ही कार्ड बन पाए । इसके बाबजूद भी सभा के पदाधिकारी निराश नहीं हैं । उनका कहना है कि चुनाव का दौर पूरा होने के बाद बाकी का भी वोटर आई कार्ड बनाने की कोशिश शुरू कर दी जाएगी । सभा की पदाधिकारी नसरीन बेगम के अनुसार कार्ड बनाने के दौरान लड़कियों को कई जिल्लतों और परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी । चुनाव के दिनों रेड लाईट एरिया के एक कोठे में रहनेवाली रजिया, नेहा, माया, कांता व बबीता को कार्ड मिल जाने पर चेहरे खिल गए थे । वे इस बात से खुश थीं कि उन्हें पहली बार वोट डालने का अधिकार मिल गया है । इसके बाबजूद वे इस बात से निराश हैं कि वोट डालने के बाद भी उनके जीवन में नई रोशनी नहीं आ पाएगी । दलालों के आतंक से मुक्‍ति कैसे मिले?जीबी रोड की सेक्स वर्कर दलालों के आतंकवाद से परेशान हैं । ग्राहकों से लूटपाट करने के अलावा दलाल सेक्स वर्करों का भी शोषण करते हैं । इस संबंध में पतिता उद्धार सभा ने गृहमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की माँग की है । गौरतलब है कि गत दिनों जीबी रोड पर रेलवे सुरक्षा के दो सिपाहियों की चाकू गोदकर हत्या कर दी गई थी । घटना को इलाके के ही एक घोषित अपराधी चमन व उसके साथियों ने अंजाम दिया था । समीप के इलाकों में रहने वाले इस तरह के अन्य बदमाश भी जीबी रोड के कोठों पर अक्सर मंडराते रहते हैं । इनके आतंक से कोठों में रहने वाली सेक्स वर्कर तथा ग्राहक दहशत में रहते हैं । इसकी वजह यहाँ बदमाशों के संरक्षण में पलनेवाले दलाल हैं । ये लोग ग्राहकों को कोठों पर ले जाने के बहाने सीढ़ियों पर ही लूट लेते हैं । विरोध करने पर मारपीट भी करते हैं । इस संबंध में पतिता उद्धार सभा के अध्यक्ष खैरातीलाल भोला के अनुसार पुलिस यहाँ सेक्स वर्करों पर तो सख्ती करती है मगर दलालों पर कोई कारवाई नहीं करती । सचिव इकबाल ने बताया कि जीबी रोड पर चार से पाँच हजार सेक्स वर्कर हैं । दलालों द्वारा उनके साथ मारपीट की घटनाएँ आम हैं । कोई घटना होने पर पुलिस कोठों पर आनेवाले ग्राहकों पर तो सख्ती कर देती है लेकिन यहाँ घूमनेवाले दलालों पर कारवाई नहीं करती । उन्होंने सरकार से इस संबंध में कारवाई की माँग की है । प्रमुख विशेषताएं* सभी लाल बत्ती क्षेत्रों में उनके बच्चों के लिए बाल विद्या निकेतन खोलना । (बाल विकास तथा देख रेख केंद्र)* वेश्याओं के बच्चों तथा अन्य को राज्य सरकारों द्वारा चलाये जा रहे ग्रामीण कुटीर गृहों में दाखिले के लिए प्रेरित करना । * राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों के साथ नियमित अंतराल पर यह सुनिश्‍चित कराने के लिए सम्पर्क करना, कि लाल बत्ती क्षेत्रों में निरोध की आपूर्त्ति की जा रही है कि नहीं । * वेश्याओं का उद्धार तथा उनका पुनर्वास ।* उन्हें सामाजिक स्तर दिलवाना, तथा प्रमुख राष्ट्रीय धारा में सम्मिलित कराना । * उन्हें राशन कार्ड, हैल्थ कार्ड तथा फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराना । * उन्हें मुफ्त चिकित्सा सहायता उलब्ध कराना । * जो वेश्याएं अपना काम छोड़ना चाहती हैं, उनकी शादी की व्य्वस्था करना ।* यदि प्रस्ताव किया जाए तो दाह संस्कार हेतु धन उपलब्ध कराना ।* राज्य सरकारों से लाल बत्ती क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए अनुरोध किया गया है । संगठनात्मक ढांचा भारतीय पतिता उद्धार सभा १९८४ में वेश्याओं और उनके बच्चों के पुनर्वास, सुव्यवस्थित तथा सुधारने में उन्हें सामाजिक स्तर प्रदान कराने तथा मुख्य राष्ट्रीय धारा में सम्मिलित कराने के लिए स्थापित की गयी थी । यह पंजीकृत गैर सरकारी संस्थाओं में से एक है । इसकी एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति है, जिसके अध्यक्ष श्री खैराती लाल भोला हैं । सभा को इसके संस्थापक, समर्थक, व कार्यकारी सदस्यों तथा अन्य माननीय सदस्यों द्वारा की जा रही संपूर्ण सहायता पर गर्व है । संपूर्ण भारत इसका अधिकार क्षेत्र है तथा ९ राज्यों में इसके कार्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां यूनिट समितियां पहले ही बनी हुई थीं। आयाम तथा विस्तारसभा द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत में लगभग २३ लाख वेश्याएं हैं तथा इनके बच्चों की संख्या ५१ लाख है, जो २,७५००० कोठों में रहते हैं । कुल ११०० लाल बत्ती क्षेत्रों की पहचान की गई है । ज्यादातर लाल बत्ती क्षेत्र शहरों के मध्य अथवा राजमार्ग पर स्थित हैं । इसके अतिरिक्‍त (काल गर्ल्स) की एक बड़ी संख्या है जो महानगरों की उच्चवर्गीय रिहायशी इलाकों में क्रियाशील हैं । महिलाओं का इस प्रकार का कब्जायिक शोषण किया जाना भारत में कोई नई बात नहीं है । इंसानी खरीद-फरोख्त का यह धंधा बहुत फल-फूल रहा है । हमारे अनुमान के अनुसार लगभग २५,५०० युवा लड़कियां हर वर्ष इस व्यवसाय में आती हैं, इनमें ‘सार्क’ देशों की लड़कियां भी सम्मिलित हैं । यह अनुमान है कि प्रत्येक वर्ष विश्‍व में लगभग १० लाख युवा लड़कियों को इस व्यवसाय में धकेल दिया जाता है । वेश्याएं तथा इनके बच्चे अति निम्न स्तरीय मानवीय परिस्थितियों में रह रहे हैं । एक कोठे में लगभग ३० से १५० व्यक्‍ति रह रहे हैं । अधिकांश वेश्याएं संक्रामक रोगों तथा एच.आई.वी. पाजिटिव/एड्‍स से पीड़ित हैं । इनकी कमाई भी बहुत सीमित होती है, जिसमें कोठी की मालकिनों, दलालों, भड़वों, राशन वालों, पुलिस कर्मियों, डॉक्टरों, साहूकारों इत्यादि को भी हिस्सेदार बनाना पड़ता है । अत्यंत ही बदहाली और तंगी में इन्हें जीवन निर्वाह करना पड़ता है । धन की कमी के कारण ये न तो अपनी चिकित्सकीय जांच करवा पाती हैं और न ही अपने बच्चों को स्कूल भेज सकती हैं । इस संबंध में यह भी बताया जाता है कि १९८२ में मद्रास में पहला एच. आई. वी. पाजिटिव का मामला प्रकाश में आया था और अपने यहां भारत में लाखों लोग इस रोग से ग्रसित हैं । अगले कुछ वर्षों में एच.आई.वी. पाजिटिव के मामले और नई सीमा तक पहुंच सकते हैं । सुरक्षात्मक उपायकेंद्र/राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए अप्रभावी उपायों के कारण वेश्यावृत्ति के धंधे को और गति मिल रही है । इस व्यवसाय को नियंत्रित करने के लिए एस.आई.टी.ए. तथा पी.आई.टी.ए. अधिनियम बनाये गये थे । इन अधिनियमों में कई संशोधन भी किए गए तथा उन व्यक्‍तियों को सख्त सजा देने के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए जो इस व्यवसाय में संलिप्त हैं । इस बात की तत्काल आवश्यकता है कि एक टास्क फोर्स बनाई जाए, जिसमें एस.डी.एम., सेवा प्राप्त अधिकारी पत्रकार, पुलिस शक्‍तियां प्रदान की जाएं, ताकि वे पुलिसकर्मियों की सहायता से छापे मार सकें । केवल यही नहीं, विशेष अदालतें खोली जाएं, वर्तमान वेश्याओं की सूची बनाई जाएं, नए प्रवेशकों को जानने के लिए पुलिस को नियमित अंतराल पर वेश्याओं की पूर्ववत संख्या जांचनी चाहिए । वेश्याओं के बच्चों को, खासतौर पर लड़कियों को, उनकी माताओं से अलग करके सरकारी गृहों में रखना चाहिए । ऐसा करने से उनके बच्चे इस माहौल से दूर रहेंगे । वेश्याओं के लिए मांगेंयह बहुत दुख की बात है कि स्वतंत्रता के पश्‍चात वेश्याओं तथा इनके बच्चों के कल्याण के लिए केंद्र/राज्य सरकारों द्वारा नहीं के बराबर कार्य किया गया है । जैसे कि ९० प्रतिशत तक वेश्याएं अनपढ़ हैं, वे अपने लिए इस व्यवसाय से मुक्‍ति पाने के लिए आवाज भी नही ंउठा सकतीं । इन्हें एस.आई.टी.ए. तथा पी.आई.टी. अधिनियम के प्रावधानों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है । इनकी दुर्दशा को देखते हुए सभा ने निम्नलिखित मांगों के लिए अपनी आवाज उठाई है ः१ . महिलाओं तथा बच्चों के पुनर्वास के लिए दीर्घ-अवधि योजनाएं लागू की जाएं । २ . इन दलित महिलाओं के पुनर्वास के लिए स्कूल सह छात्रावास की स्थापना करना । ३ . संबंधित विभागों को राशन कार्ड, मतदाता फोटो पहचान पत्र, चिकित्सा कार्ड आदि जारी करने के लिए निर्देश देना । ४ . बीमा, पेंशन योजनाओं को शुरू करना तथा बचत योजनाओं के लिए इन्हें प्रोत्साहित करना । ५ . रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ।६ . इनके मामलों के लिए पृथक आयोग/विभाग की स्थापना की जाए ।७ . इनके बच्चों के लिए नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था तथा अन्य संस्थाओं को अलग से रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए । ८ . सेक्स वर्करों को निःशुल्क कंडोम वितरित करें ताकि एड्‌स जैसी बीमारी से बच सकें । सभा द्वारा चलाए जा रहे बाल विद्या निकेतनहमारी सभा वाराणसी तथा इलाहबाद में इन दलित महिलाओं तथा अन्य बच्चों के लिए दो बाल निकेतन (बाल विकास तथा देखभाल केंद्र) चला रही है । वर्तमान समय में लगभग १४० बच्चे स्कूलों मेंपढ़ रहे हैं, इसके अतिरिक्‍त सभा द्वारा वेश्याओं के ३०९ बच्चों को दिल्ली सरकार के ग्रामीण कुटीर गृहों में दाखिले के लिए प्रयोजन किया गया है । प्रति वर्ष अप्रैल तथा नवम्बर माह में हम दो स्कूल समारोह आयोजित करते हैं, जिसके दौरान स्कूल के बच्चों में ग्रीष्म कालीन तथा शरद कालीन वर्दियों तथा अन्य शिक्षा संबंधी साम्रगी का वितरण किया जाता है । हमारे बाल विद्या निकेतनों में बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है । मध्यान्ह में दिए जाने वाले आहार, वर्दियों, स्कूल बैग, जूते, शिक्षा संबंधी सामग्री, परिवहन, चिकित्सा सुविधाओं, पिकनिक इत्यादि के संबंध में खर्चे सभा द्वारा ही किए जाते हैं । सभा में सचिव, महिला तथा बाल विकास विभाग तथा अध्यक्ष केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड को सूरत, मुंबई, आगरा, फिरोजाबाद, बस्ती, वाराणसी, (दूसरी शाखा), पुणे, नागपुर, राजकोट, हैदराबाद, अन्‍नापति, बेंगलूर, कोलकाता, मुजफ्फरपुर, चेन्‍नई, भोपाल, भुवनेश्‍वर तथा दिल्ली में बाल विकास तथा देखभाल केंद्र खोलने के लिए कई नई योजनाएं प्रस्तुत की हैं । भूमि/भवन के लिए अनुरोधसभा ने नियमित अंतराल पर दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्‍चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, तथा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्य मंत्रियों से दलित महिलाओं के बच्चोंके लिए उचित भूमि/भवन दान में देने लिए अनुरोध किया है, किंतु अभी तक हमारे अनुरोधों पर कोई विचार नहीं किया गया है । एड्‌स के प्रति जागरूकता अभियानकेंद्र/राज्य सरकारें भारत के शहरों तथा नगरों में एड्‌स के प्रति जागरूकता अभियान चला रही हैं परन्तु अभी तक अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो सकी है और एड्‌स के मामले खतरनाक ढंग से बढ़ते जा रहे हैं । इस मोर्चे पर और अधिक प्रबल प्रयास अपेक्षित है । यह भी कहा गया है कि एड्‌स ग्रस्त वेश्‍याओं को अलग से अस्पताल में रखा जाए तथा २००० रूपए प्रति माह निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाए । माननीय अदालतों के निर्णयसभा ने दिनांक २१.१.८८ को माननीय भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में दाखिले फार्म में पिता के साथ माता का नाम भी जोड़े जाने के लिए रिट पैटिशन दाखिल की थी । माननीय जजों ने दिनांक १२.१.९३ को हमारे पक्ष में निर्णय सुनाया था । यह केवल सभा द्वारा किए गए वास्तविक प्रयासों का ही परिणाम था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को माता का नाम फार्म में जोड़ने के लिए निर्देश दिया । पूरे भारत में इसके द्वारा लगभग ३ करोड़ बच्चों का स्कूल में दाखिला संभव हो सका है । सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अन्य केस में सभा ने केंद्र/राज्य सरकारों से इन दलित महिलाओं के लिए कई राहतों की मांग की थी । ९.७.९७ को दिए ऐतिहासिक फैसले में माननीय न्यायधीशों ने केंद्र/राज्य सरकारों को समितियां बनाने तथा इन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराने के आदेश दिए । व्यावसाय को विधिक रूप से मान्य बनानावेश्याओं की परिस्थितियों के मद्दे नजर इनके व्यवसाय को वैधनिक मान्यता प्रदान करने की आवश्यकता है । यहां यह कहना संगत होगा कि विश्‍व के १७५ देशों में इस व्यवसाय को वैधानिक मान्यता प्राप्त है । उज्जैन में नगरपालिका ने वेश्याओं को लाइसेंस जारी किए हैं । इस संबंध में दिनांक १०.९.९८ को सुप्रीम कोर्ट में एक केस दाखिल किया गया । अक्टूबर में माननीय न्यायाधीशों द्वारा यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया गया कि यह सरकार के पॉलिसी का मामला है । अपील सन्‌ १९८४ से अस्तित्व में आई भारतीय पतिता उद्धार सभा वेश्याओं तथा उनके बच्चों के पुनर्वास, उद्धार तथा कल्याण के लिए सेवारत है । सभा ने ९ राज्यों में अपने ऑफिस खोले हुए हैं । पुलिस की मदद से सभा अब तक अनेक वेश्याओं को कोठों से मुक्‍त करा चुकी है । सभा ने सूरत तथा दिल्ली में वेश्याओं के प्रति फ्री मेडिकल चेक-अप का भी इंतजाम किया । उल्लेखनीय है कि वेश्याओं और उनके बच्चों में निरक्षरता की दर ८५ प्रतिशत से अधिक है । वेश्याओं, उनके बच्चों तथा विधवाओं इत्यादि को नर्सरी से पांचवी तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए सभा ने वाराणसी तथा इलाहबाद में दो बाल विद्या निकेतन भी खोले हैं। ये दोनों उपक्रम भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं तथा केंद्रीय सामाजिक कल्याण बोर्ड द्वारा इन्हें सभी जरूरी सहायता मुहैया कराई जाती हैं । इन स्कूलों में वेश्याओं, बेसहाराओं, तथा विधवाओं के १५० से भी अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । उन्हें स्कूली वर्दी, कापी-किताबें, दोपहर का भोजन और चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त प्रदान की जा रही हैं । सभा ने दिल्ली सरकार के कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण कुटीर गृह मेंभी ३१५ बच्चों के प्रवेश को प्रयोजित किया है । सभा ने प्रोजेक्ट्‌स मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्त्री और बाल विभाग के पास भेज दिए हैं ताकि सूरत, मुंबई, आगरा, फिरोजाबाद, बस्ती, हरिद्वार, पुणे, नागपुर, राजकोट, हैदराबाद, अन्‍नापति, बंगलौर, कोलकाता, मुजफ्फरपुर, पटना, चेन्‍नई, भोपाल, भुवनेश्‍वर और नई दिल्ली में भी बाल विद्या निकेतन खोले जा सकें । सरकार से मंजूरी और सहायता मिलने में विलंब होने के कारण सभा नए प्रोजेक्ट्‌स पर काम कर पाने में असहाय महसूस कर रही है । अतः सभा की समाज के सभी वर्गों के लोगों से चाहे वे अप्रवासी भारतीय हों, विदेशी संगठन हों, धमार्थ ट्रस्ट हों या वित्तीय तथा व्यापारिक संगठन हों, अपील है कि वे खुले हाथों से हमें दान दें ताकि मुसीबत की मारी औरतों और बच्चों का उद्धार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके । हम सभी को विश्‍वास दिलाते हैं कि जो राशि वे हमें दान में देंगे उससे सभा देश के सभी रेड लाइट क्षेत्रों में समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए स्कूल और डिस्पेंसरी खोलेगी । दानकर्ता किसी बच्चे की शिक्षा, भोजन, वर्दी तथा चिकित्सा सुविधाओं की जिम्मेदारी भी ले सकते हैं । प्रत्येक दो वर्ष बाद सभा द्वारा प्रकाशित सूची में दानकर्ताओं के नाम प्रकाशित किए जाते हैं । सभा को दान में दी जाने वाली राशि सेक्शन ८०जी तथा एफसीआरए नंबर 231650656 के अंतर्गत पूरी तरह से आयकर मुक्‍त होगी ।

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