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कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में कैरियर

प्रश्न ः कंटेंट राइटिंग क्या है ? उत्तर ः किसी खास विषयवस्तु पर लिखना ही कंटेंट राइटिंग कहलाता है । प्रकाशन से पूर्व प्रकाशन की रणनीति बनती है । रणनीति का थीम प्लान किया जाता है । फिर थीम को विजुअलाइज किया जाता है । इस विजुअलाइजेशन में सभी आयामों को तरजीह देने के बाद जो फाइनल कंसेप्ट तैयार होता है, उसे अगर गिने-चुने शब्दों में प्रस्तुत करना हो तो उसे कंटेंट कहेंगे । कंटेंट के चुनाव एवं उसके नामकरण हेतु पूरी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यही संपूर्ण लिखित सामग्री का मूलाधार है । कंटेंट का नाम ऐसा होना चाहिए जो आसानी से हर पाठक समझ सके । साथ ही उसे गागर में सागर का पर्याय भी हम सकते हैं । आज किसी के पास पढ़ने के लिए भरपूर समय नहीं होता है । ऐसी परिस्थिति में संक्षिप्त एवं सारगर्भित पठनीय सामग्री और उसका यथोचित शीर्षक होना चाहिए । आईटी के बढ़ते प्रभाव के कारण बेवसाइट जगत में कंटेंट राइटरों की माँग बढ़ी है । वेबसाईट में लिंक और सबलिंक होते हैं । आपको संबंधित विषयवस्तु को उसी लिंक या सबलिंक से जोड़ना होता है । आज हर व्यक्‍ति चाहता है कि उसे अपनी इच्छानुसार विषय या पसंद की सारी जानकारी एक जगह उपलब्ध हो । इसी चाहत के कारण कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में म~Mje -मजाए पत्रकारों/लेखकों की भारी माँग है । इसके साथ जिनकी लेखनी मे नयापन एवं दृष्टि के साथ-साथ समन्वय की शक्‍ति हो उनके लिए यह क्षेत्र अत्यंत उपयुक्‍त है ।
प्रश्न ः इसके लिए कौन योग्य है?उत्तर ः कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में जहाँ तक योग्यता का प्रश्न हैं उसके संदर्भ में इतना ही कहना ज्यादा उपयुक्‍त होगा कि इसके लिए सर्टीफिकेट के बजाय व्यावहारिक दक्षता ज्यादा मायने रखती है । हालाँकि मास कम्युनिकेशन कोर्स या क्रिएटिव राइटिंग का कोर्स करने वाले कुछ अनुभवी के साथ दक्षता हासिल कर सकते हैं । वास्तव में अच्छे कंटेंट राइटर में शिक्षता, अनुभव, दक्षता, चातुर्य, व थीम प्लानिंग आदि सभी का गुण होना चाहिए । इसके लिए कोई निश्‍चित नियमावली नहीं है । विभिन्‍न परिस्थितियों के अनुसार, माँग के अनुरूप विषय सापेक्षितों पर यह निर्भर करता है । दूसरी प्रमुख बात यह है उसका प्रस्तुतीकारण करने की क्षता कितना है । साधारण थीम या स्टोरी का यदि बेस्ट प्रेंजेंटेशन हो तो कंटेंट का मजा दूना हो जाता है । इसके लिए विभिन्‍न संदर्भों का जिक्र एवं खोजपरक सामग्री पर जोर दिया जाना चाहिए । कंटेंट की भाषा सरल एवं सुगाह हो ही साथ ही साथ विषय केंद्रित हो । उसमें भटकाव ना हो । एक बेस्ट कंटेंट राइटर को लिखने से पहले सभी प्वाइंट पर डिस्कशन कर लेना चाहिए । फिर अनसुलझे या विवाद या नहीं समझ में आ रहे तथ्यों पर निःसंकोच शुरू में ही चर्चा कर लेनी चाहिए । इससे समय भी बचेगा और रचना में निखार आएगा । कंटेंट राइटर के गुण की चर्चा करें तो उनमें निम्न पंक्‍ति बिल्कुल मौजूद होने चाहिए- “कहीं का ईंट कहीं आ रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा ”
प्रश्न ः इस क्षेत्र में कैरियर हेतु क्या संभावनाएँ हैं?उत्तर ः कंटेंट राइटिंग एक व्यापक क्षेत्र हैं जो साहित्य, पत्रकारिता से भी अलग है । कोई जरूरी नहीं कि एक साहित्यकार या पत्रकार एक अच्छा कंटेंट राइटर हो क्योंकि पत्रकारिता या साहित्य में ज्यादातर लोग अपने पसंद की विधा पर ही लिखते हैं परंतु कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में विधाओं का बंधन नहीं है । विशेषकर आइटी क्षेत्र की सभी कंपनियों में अग्रेजी एवं हिंदी कंटेंट राइटर की विशेष माँग है । वेबसाइट निर्माता कंपनियों का काम बिना कंटेंट राइटर के सहयोग के पूरा हो ही नहीं सकता । सबसे खास बात यह है किकंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में ऑफिस जाने की अनिवार्यता जरूरी नहीं है जिससे इस क्षेत्र में पार्टटाइम या घर पर रहकर भी किया जा सकता है । प्रोजेक्‍ट बनाने वाले लोगों को भी कंटेंट राइटर की आवश्यकता होती है । अधिकांश शिक्षित लोगों में अभी भी कंटेंट राइटर के महत्व से अनभिज्ञता भी है परन्तु यह अकाट्‌य सत्य है कि इसकी लोकप्रियता एवं माँग दोनों में वृद्धि हुई है । औसत रुप से न्यूनतम ५ हजार से लेकर अधिकतम ५० हजार रूपए मासिक कमाने वाले कंटेंट राइटर भी हैं । वह दिन दूर नहीं जब कंटेंट राइटिंग मैनेजमेंट की शुरूआत भी हो जाय । कुल मिलाकर इस क्षेत्र में सीखने के साथ-साथ, यश और प्रतिष्ठा भी भरपूर है । कंटेंट राइटर का प्रत्यक्ष संबंध संस्था के सर्वोच्च कमान से होता है ।
वांछित प्रवीणता (कौशल)इसके लिए पहले से ज्यादा से ज्यादा संभावित तथ्यों को उभारें । फिर उसे छोटे से छोटे में प्रस्तुत करें । उसके साथ ही उसके सिक्वेंस (आवृत्ति) पर भी ध्यान दें । बुलेट प्वाइंट्‌स का इस्तेमाल करें । महापुरूषों के कोटेशन एवं रचनात्मकता को एक साथ शामिल कर नई जान फूँक सकते हैं । अपनी अलग पहचान बनाने के लिए आपको चाहिए कि स्वयं की इच्छा या चाहत के बजाय संस्था या संस्था के मालिक की मंशा/मनोवृत्ति को भी परखने की जरूरत है । पूरी रामायण या महाभारत लिखने के बजाय कम शब्दों में अधिक बातें व संतुलन ही आपकी योग्यता को सही अर्थों में दर्शाती है ।
कंटेंट राइटिंग के सकारात्मक एवं नकारात्मक पहलूकंटेंट राइटिंग की सकारात्मकता एवं नकारात्मकता आपके समझ पर निर्भर करते है । अगर विषयवस्तु को अपने ठीक-ठाक समझते हुए कंटेंट राइटिंग की तो सकारात्मक परिणाम होंगे । ठीक उसी तरह यदि आपने विषय को ही ठीक -ढंग से नहीं समझा और लेखनी चलाते रहे तो फिर ऐसे में सारा मेहनत बेकार भी चला जाता है और आपकी माइनस मार्किंग भी होती है अर्थात उसे आपकी अयोग्यता समझी जाएगी ।

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