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राजनीति की पाठशाला

क्यों ? राष्ट्र इस समय एक गंभीर राजनैतिक संकट से गुजर रहा है । हमें एक नए लीडर की सख्त जरूरत है जो नागरिकों को आदर और आत्म सम्मान दिला सके जो देश का हित अपने हित से उपर रख सके । राष्ट्रवादी चिन्तन और राष्ट्रनिर्माण के लिए हमें युवाओं की शत्‌-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्‍चित करना होगा, क्योंकि आज की परिस्थितियों में राष्ट्र का निर्माण युवा हाथों से ही संभव है । अतः राजनीतिक शिक्षा ही इसका एक सशक्‍त माध्यम है ।
कैसे ? हर देश की आत्म कहानी उनके नागरिकों के सुकर्मों- कुकर्मों से लिखी जाती है । अपने पाँव पर खड़े होने की कीमत चुकानी पड़ती है और घुटनों को टेककर जीने की भी कीमत चुकानी पड़ती है । फैसला आपका है- अत्याचार और अन्याय का विरोध न करना उसे बढ़ावा देना है । यह उन निष्ठावान लोगों का संगठन है जो उसूलों और सिद्वान्तों के आधार पर दुबारा से देश को अपराध, अन्याय, भ्रष्टाचार और गरीबी से आजाद कराने के लिए उतरे हैं । युवाओं को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना और उनको राजनीतिक प्रशिक्षण देना गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों की शत्‌-प्रतिशत राजनीति में भागीदारी सुनिश्‍चित करना हमारा एक मात्र लक्ष्य है । हमारा मानना है, कि राजनीति की पाठशाला माध्यम है लाखों युवाओं की राजनीतिक योग्यता एवं उनकी महत्वाकांक्षाओं को सम्मान मिल सकेगा जो धनबल एवं बाहुबल के अभाव में अपने सपनों का गला घोटते हैं । इसीलिए भ्रष्ट एवं बेईमान लोग हम पर शासन करते हैं । बूथ स्तर पर प्रबन्धन, पंचायत स्तर पर प्रबन्धन, विधान सभा, लोक सभा इत्यादि पर चुनावी प्रबन्धन के माध्यम से चुनाव खर्चों को कम कर आम नागरिक एवं अच्छे लोगों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना है ।
किसके लिए ? हर सच्चा नागरिक सुख-समृद्धि और सुरक्षा से जीना चाहता है,इसके लिए आवश्यक है कि हम कायरता छोड़े अत्याचार एवं अन्याय के खिलाफ खड़े हों । यह देश भक्‍त लोगों के चयन का एक माध्यम है। उन्हें आगे लाकर आगे लाकर हमें अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त करना है। हमारा वास्तविक लक्ष्य युवा हाथों को मजबूत कर उनके लिए १०० प्रतिशत रोजगार की व्यवस्था सुनिश्‍चित करना है तथा आम आदमी जो गरीब है उसकी प्रति व्यक्‍ति आय को ५०० गुना बढ़ा कर उसकी क्रय क्षमता बढ़ानी है क्योंकि आर्थिक तरक्‍की ही गरीबी से छुटकारा का एक मात्र माध्यम है । स्वालम्बन की भावना को जागृत कर प्रत्येक व्यक्‍ति को आर्थिक आधार पर समृद्ध करने का मंत्र है राजनीति की पाठशाला ।
राजनीति का सामाजीकरण : राजनीति का अपराधीकरण जिस तरह से विगत वर्षों में हुआ है तथा हमारे रहनुमाओं ने जिस तरह से देश की सामाजिक सभ्यता को तार-तार किया है उसकी वजह से समाज में जातिगत आधार पर द्वेष एवं घृणा बढ़ी है तथा इस पीड़ा से हम सभी भली-भाँति अवगत है आज जरूरत है कि राजनीति के समाजीकरण पर बल दिया जाय ताकि देश में असमानता खत्म हो । हम सभी निष्ठावान लोग जो देश हित को व्यक्‍तिगत हित से उपर रखते हैं, वो भारत के प्रत्येक नागरिक को आदर एवं आत्म सम्मान दिला सकें ।

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