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अब होगी भारत में 140 अक्षरों की क्रांति !

भारत में चंद बड़े नामों के मा‌इक्रोब्लॉगिंग सा‌इट Twitter पर मौजूदगी के बीच एक सवाल क‌ई लोगों को सालता है कि क्यों इनके फॉलो‌अर्स की संख्या महज हज़ारों में हैं ? विदेश राज्य मंत्री शशि थरुर को छोड़ दें, जिनके Twitter पर फॉलो‌अर्स की तादाद तीन लाख पार कर चुकी है, तो दूसरा को‌ई देश में रह रहा भारतीय नाम नज़र नहीं आता,जिसके फॉलो‌अर्स की संख्या लाख पार की हो। यहां तक प्रियंका चोपड़ा, मल्लिका शेरावत,लारा दत्ता और गुल पनाग जैसी फिल्मी अभिनेत्रियों के प्रशंसकों की तादाद ट्विटर पर अभी एक लाख तक नहीं पहुंची है।

दर‌असल, सोशल नेटवर्किंग सा‌इट Twitter की जबरदस्त चर्चा के बावजूद एक सच यह भी है कि अभी तक भारत में आम लोगों के बीच इसकी पहुंच नहीं थी। देश में इंटरनेट उपयोक्ता‌ओं की संख्या की अभी 8 करोड़ तक पहुंची है, जिसमें सक्रिय नेट उपभोक्ता तकरीबन पांच करोड़ ही हैं। बावजूद इसके, ट्विटर भारत की सर्वाधिक लोकप्रिय सा‌इटों में 13वें नंबर पर है,जबकि दुनिया के कुल ट्विटर उपभोक्ता के 7 फीसदी भारत में हैं। यानी इस मामले में अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत का नंबर आता है। लेकिन, आंकड़ों के इस खेल में एक तथ्य छिप जाता है कि अभी दुनिया में ट्विटर के कुल उपयोक्ता‌ओं की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा नहीं है। इस लिहाज से भारत में ट्विटर के उपयोक्ता‌ओं की संख्या ज्यादा से ज्यादा करीब 20 लाख हो सकती है। सिर्फ 20-25 लाख उपयोक्ता‌ओं के साथ ट्विटर की उपयोगिता सीमित थी।

लेकिन, अब भारत में ट्विटर क्रांति हो सकती है। इसकी वजह है ट्विटर और दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के बीच समझौता। इस समझौते के बाद एयरटेल के करीब 11 करोड़ ग्राहकों के पास एक झटके में ट्विटर की सुविधा पहुंच चुकी है। साधारण शब्दों में कहें तो अब एयरटेल के ग्राहक अपने किसी भी मोबा‌इल सेट के जरि‌ए ट्विटर को एक्सेस कर सकते हैं। इसके लि‌ए उन्हें मोबा‌इल के जरि‌ए इंटरनेट खोलने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें महज एस‌एम‌एस की तरह 53000 पर संदेश भेजना होगा। एक ट्वीट भेजने का खर्च एस‌एम‌एस जितना होगा, जबकि ट्वीट प्राप्त निशुल्क कि‌ए जा सकेंगे।

बहुत से लोगों के लि‌ए इस समझौते की खबर महज एक खबर भर हो सकती है। लेकिन, देश में अचानक 11 करोड़ से ज्यादा लोगों तक इस सेवा का पहुंचना ट्विटर क्रांति का सूचक है। नेट पर ट्विटर की सा‌इट खोलकर संदेश भेजना अथवा मोबा‌इल के जरि‌ए नेट एक्सेस करते हु‌ए ट्वीट करना-ये दोनों ही झंझट भरे काम थे। लेकिन, अब 140 अक्षरों वाला यह हथियार करोड़ों आम लोगों के पास जा पहुंचा है। फिर, देर सबेर दूसरी दूरसंचार कंपनियां भी ट्विटर ग्राहकों को ये सुविधा देंगी ही।

दर‌असल, ट्विटर की धार का अहसास सही मायने में अब हो सकता है,क्योंकि पहली बार लोगों को एक ट्वीट राह चलते महज एक एस‌एम‌एस की कीमत पर सैकड़ों-हज़ारों लोगों को करने का मौका मिलेगा। करोड़ों लोगों की ट्विटर पर मौजूदगी ही इसके सामाजिक पहलू को सामने ला सकती है। मुमकिन है कि अब ट्विटर ग्राहक दबाव समूह के रुप में भी कार्य करते दिखें, क्योंकि अब चंद लोगों की आवाज़ को सामूहिक होने भी वक्त नहीं लगेगा। अमेरिका की तरह यहां भी किस्म-किस्म के आंदोलनों को परवान चढ़ाने में ट्विटर की भूमिका हो सकती है। हां, ये सवाल जरुर है कि कितनी जल्दी लोग ट्विटर को लेकर जागरुक होते हैं। लेकिन, इसमें को‌ई दो राय नहीं कि अगर आम मोबा‌इल फोन के जरि‌ए हिन्दी और क्षेत्रीय भाषा‌ओं में एस‌एम‌एस की राह आसान हु‌ई तो फिर ट्विटर मूवमेंट का असर देखने लायक हो सकता है।
-Piyush Pandey

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